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साहित्य की कसौटी पर इन्टरनेट की रचनाएँ Misc

Arvind Joshi

कुछ दिन पहले आयोजित ताज साहित्य महोत्सव में इस विषय पर बहुत चर्चा हुई, शायद इसलिए कि साहित्यकार और पुराने साहित्य के पंडित इस इन्टरनेट के जानवर की बहुत अवाजें सुनने लगे हैं - और अक्सर इसकी सड़क छाप भाषा और इसके अनुशासन हीन लेखक साहित्य के पॉलिसियों को परेशान कर रहे हैं।

बाज़ार रियलिटी शो के पीछे का Misc

Piyush Pandey

आप ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में हिस्सा लेना चाहते हैं तो क्या करना चाहिए? कार्यक्रम के लिए आपका चयन हो गया है तो सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए क्या किया जाए? ‘फास्टेस्ट फिंगर’ राउंड में किस तरह उंगलियां पटल पर रखी जाए कि तेजी से जवाब दिया जा सके? और हॉट सीट पर बैठने के बाद सदी के महानायक के समक्ष बैठते वक्त आत्मविश्वास में कमी न आए इसके लिए क्या उपाय किए जाए?

जी़ संकट बनाम मीडिया की विश्वसनीयता Misc

Ram Bahadur Rai

जी न्यूज चैनल पर नवीन जिंदल की कंपनी ने 100 करोड़ रुपए मांगने का अरोप लगाया है। कंपनी ने इस बाबत एफआईआर भी दर्ज कराया है। आठ दिन बाद बीइए ने एक आपात बैठक बुलाकर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है, जो दो हफ्तों में रिपोर्ट देगी।

पत्रकारों के सामने चुनौती Misc

Punya Prasun Bajpai

आपको दस्तावेज चाहिये, हम तुरंत दे देगें। लेकिन हमारा नाम न आये इसलिये आप आरटीआई के तहत दस्तावेज मांगे। इसके लिये लिये तो नोटरी के पास जाना होगा। दस रुपये का पेपर लेना होगा। ना ना आप सिर्फ दस रुपये ही नत्थी कर दीजिये और दस्तावेज भी आपको हम हाथों हाथ दे देते हैं। आपको महीने भर इंतजार भी नहीं करायेंगें। आप खबर दिखायेंगे तो गरीबों का भला होगा। और सादे कागज पर आरटीआई की अर्जी के साथ दस रुपये नत्थी कर देने के बाद जैसे ही बाबू खबर से जुड़े दस्तावेज रिपोर्टर के हाथ में देता है वैसे ही कहता है, खबर दिखा जरुर दीजिएगा।। मंत्री महोदय से कोई समझौता ना कर लीजियेगा या डर ना जाइयेगा।

हिंदी के शोकधुन पर नाचती दुनिया Misc

Alok Kumar

हिंदी दिवस पर एक से बढकर एक संवेदनशील टिप्पणियां सामने आ रही हैं। आईए तीन मिसालों पर गौर करें और मसले को समझने की कोशिश करें। एक साथी ने फेसबुक पर झकझोरते हुए लिखा - की-पैड पर अंग्रेजी में अक्षरो से हिंदी लिखने का दर्द, मेले में मां की अंगुलियों से छूटकर गुम जाने जैसा है। जाहिर तौर पर साथी ने हिंदी को लेकर काले अंग्रेजों के आगे हमारे नत मस्तक हो जाने की टीस नहीं झेल पाए। दर्द का बारीकी से इजहार कर डाला । साथ ही हमारी संवेदना की शिथिल पडी डोर को खिंच डाला ।

सोशल मीडिया बदलेगा बॉलीवुड को ! Misc

Piyush Pandey

मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने 1976 में फिल्म बनायी थी-मंथन। फिल्म का बजट करीब 12 लाख था। ‘मंथन’ गुजरात डेयरी उद्योग की सहायता से बनी थी, जिसमें पाँच लाख किसानों ने दो-दो रुपए का योगदान दिया था। बूंद-बूंद कर घड़ा भरा और एक महान फिल्म का जन्म हुआ। सहकारिता के फॉर्मूले पर बनी ‘मंथन’ के प्रयोग को सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए अब नए सिरे से अपनाया जा रहा है।

अकेले इंसान की ताकत कम नहीं Misc

Aamir Khan

मैं अकेला क्या कर सकता हूं? एक अरब बीस करोड़ की आबादी में मैं तो बस एक हूं। अगर मैं बदल भी जाता हूं, तो इससे क्या फर्क पड़ेगा? बाकी का क्या होगा? सबको कौन बदलेगा? पहले सबको बदलो, फिर मैं भी बदल जाऊंगा।

राजेश खन्ना को जीना आसान नहीं ! Misc

Punya Prasun Bajpai

छोटे पर्दे पर बड़ा पर्दा छा जाये ऐसा होता नहीं है। लेकिन 70 के दशक के सुपरस्टार की मौत ने छोटे पर्दे का चरित्र 48 घंटे के लिये बदल दिया।

पानी की कमी के खतरे Misc

Aamir Khan

जब मानव अंतरिक्ष के बाहर जीवन के लक्षणों की तलाश करता है तो सबसे पहले क्या देखता है? वह देखता है जल का अस्तित्व। किसी भी ग्रह में जल की उपस्थिति से यह संकेत मिलता है कि वहां जीवन संभव है।

पुष्पाओं की तरफ से (व्यंग्य) Misc

Alok Puranik

राजेश खन्नाजी काका चले गये। श्रद्धांजलियां सभी की हैं। पर मैं दिल पे हाथ रखकर कहता हूं कि दिल से, दिल के बहुत ही गहरे कोने से निकली आह से बिंधी हुई आत्मीय श्रद्धांजलियां सिर्फ उन आदरणीयाओं की हैं, जिनकी उम्र अभी करीब साठ से पैंसठ के बीच की है।

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