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गुरुजी का टोटा (व्यंग्य) Misc
Piyush Pandey
हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र और न जाने कौन कौन से विज्ञान और शास्त्रों के टीचरों का टोटा छात्रों को कभी नहीं रहा। गली के एक छोर से दूसरे छोर तक हर बेरोजगार ऐसे ही किसी सब्जेक्ट की पट्टी टांगकर स्टूडेंट को लतियाता रहा है-साले कब पढ़ना सीखोगे। तुम्हारे दिमाग में भूसा भरा है। वगैरह वगैरह।
‘करप्शन ’ पर अनशन (व्यंग्य) Misc
Piyush Pandey
मामला बड़ा विकट हो गया है। दो महीने से पत्नी रात के खाने में कोटे की चार रोटियां भी नहीं सेंक रही है। दो रोटियां बेलने के बाद ‘वर्चुअली ’ पड़ोस के वर्मा के घर में दाखिल हो जाती है। उनके घर आई नयी गाड़ी से लेकर वर्माइन के कलाइयों में पड़े नए कंगनों तक का दर्शन कराती है।
खेल के नाम पर तमाशा करती सरकारें Misc
Abhishek Tripathi
यदि पिछले कुछ महीनों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि 2010 खेलों के लिहाज से विवादों से भरा साबित हुआ। चाहे दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल हों या पांच बार से टल रहे रांची में होने वाले राष्ट्रीय खेल।
चि‍दंबरम शालीनता से करें शब्‍दों का प्रयोग Misc
Swami Chinmyanand
भगवा शब्द एक रंग का वाचक है, वह तो एक रंग है, सिर्फ रंग, जिसे उगते हुए सूरज में अथवा अग्नि की लपटों अथवा कुछ बहुत कम खिलने वाले फूलों में देखा जाता है। केसर से मिलता जुलता होने के कारण कुछ लोगों ने जहाँ इसे केसरिया कहाँ वही अंग्रेजी में इसे Saffron कहा जाने लगा।
ध्यानचंद सिर्फ हॉकी खिलाड़ी नहीं थे Misc
Narendra Pal Singh
1992 का साल, ओलंपिक का साल। रसातल की ओर जाती भारतीय हॉकी एक पायदान और नीचे खिसक गई। बार्सिलोना में भी आठ बार की ओलंपिक चैंपियन भारतीय टीम एक और शिकस्त झेल कर घर लौटी। अपने पहले तीनों लीग मुकाबले हारने के साथ ही सेमीफाइनल से बहुत पहले उसकी चुनौती खत्म हो गई थी।
आजाद के एनकाउंटर का बड़ा सवाल Misc
Punya Prasun Bajpai
नागपुर का आंनद होटल। सुबह का नाश्ता करने सीताबर्डी के इसी होटल में किसी ने आजाद को बुलाया था। यहीं पर आजाद के साथ हेम पांडे भी था। और जिस तीसरे शख्स ने इस होटल को सुबह बातचीत और नाश्ते के लिये चुना, वह जानता था कि इस गली से निकलने के सिर्फ दो ही रास्ते हैं।
देवनागिरी लिपी में वेब पते के मायने Misc
Piyush Pandey
इस साल 15 अगस्त को इंटरनेट को भारत में आए 15 साल पूरे हो गए। डेढ़ दशक में इंटरनेट ने भारत में खूब विस्तार किया। लेकिन सवा अरब की आबादी वाले मुल्क में अभी भी सिर्फ आठ-नौ करोड़ लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।
‘पीपली लाइव’ से कुछ आगे जाकर Misc
Jyoti Nanda
‘पीपली लाइव’ के बारे में काफी कुछ लिखा जा चुका है. मैंने भी फिल्म देखी बाहर निकलते हुए यही सोच रही थी सब कुछ तो लिखा जा चुका है. काश मैंने भी फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो देखी होती. लेकिन घर आकर जब दिमाग में पूरी पिक्चेर रिवाइंड हुयी तो लगा अभी तो बहुत कुछ है जो रह गया.
रंदीव से ज्‍यादा गुनाहगार है आईसीसी Misc
Abhishek Tripathi
जब अंग्रेजों ने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उन्होंने कोशिश की कि यह जेंटलमेन गेम बना रहे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। गाहे-बगाहे ऐसे कारनामे होते गए, जिससे इस खेल की छवि खराब होती गई।
... तो इसलि‍ये बढ़नी चाहि‍ये सांसदों की तनख्‍वाह Misc
Agastya Arunachal
महाराष्ट्र में हर साल होनेवाली मशहूर पंढरपुर यात्रा में लाखों भक्त शामिल होते हैं। नाचते-गाते भक्तों की जमात में कुछ ख़ास बच्चे भी होते हैं। अनाथालय में पलनेवाले ये वो मासूम हैं, जिनके खेतिहर माता-पिता ने कर्ज में डूबकर जान दे दी थी। 2008 में पंडरपुर यात्रा में शामिल इन बच्चों की संख्या 27 थी, जो 2009 में बढ़कर 62 हो गई। महाराष्ट्र में हर साल होनेवाली मशहूर पंढरपुर यात्रा में लाखों भक्त शामिल होते हैं। नाचते-गाते भक्तों की जमात में कुछ ख़ास बच्चे भी होते हैं। अनाथालय में पलनेवाले ये वो मासूम हैं, जिनके खेतिहर माता-पिता ने कर्ज में डूबकर जान दे दी थी। 2008 में पंडरपुर यात्रा में शामिल इन बच्चों की संख्या 27 थी, जो 2009 में बढ़कर 62 हो गई।
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कला के बीच नहीं आ सकतीं मजहब की दीवारें: बि‍रजू महाराज
कथक का पर्याय हैं बिरजू महाराज। 72 साल की उम्र में भी उनके हौसले जवां हैं। नृत्य उनके लिए साधना है, जिसमें लीन होने के बाद उनके पैरों की थाप से एक नयी दुनिया सजती है। कथक की धारा के साथ बहते-बहते कब वो बृजमोहन नाथ मिश्रा से पंडित बिरजू महाराज हो गये उन्हें खुद भी पता नहीं चला। नई पौध को कथक की बारीकियों से सजाने-संवारने में उन्हें बहुत आनंद आता है। उनसे खास बात की प्रतिभा कटियार ने।
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