कथक का पर्याय हैं बिरजू महाराज। 72 साल की उम्र में भी उनके हौसले जवां हैं। नृत्य उनके लिए साधना है, जिसमें लीन होने के बाद उनके पैरों की थाप से एक नयी दुनिया सजती है। कथक की धारा के साथ बहते-बहते कब वो बृजमोहन नाथ मिश्रा से पंडित बिरजू महाराज हो गये उन्हें खुद भी पता नहीं चला। नई पौध को कथक की बारीकियों से सजाने-संवारने में उन्हें बहुत आनंद आता है। उनसे खास बात की प्रतिभा कटियार ने।
प्रीतो ने अखबार में पढ़ा कि एक आदमी ने अपनी बीवी को कार के बदले बेच दिया। प्रीतो: आप तो ऐसा नहीं करोगे ना जी? संता: पागल हूं क्या, मैं तो साइकल से ही काम चला लूंगा। तुम्हारे बदले कार कौन बेवकूफ देगा।