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शुभ फलदायक है मंगलागौरी व्रत Astrology

Anirudh Sharma

अनिरुद्ध शर्मा श्रावणमास में जितने भी मंगलवार पड़े उन सभी को मंगलागौरी-व्रत एवं मंगलागौरी-पूजन करने को कहा गया है। इस व्रत में मंगलवार के दिन शिव की पत्नी गौरी अर्थात् पार्वती की पूजा की जाती है। इसी कारण इसे मंगलागौरी-व्रत कहते हैं। यह व्रत विवाह पश्चात् प्रत्येक विवाहिता द्वारा पाँच वर्षों तक करना शुभफलदायक माना गया है। इस व्रत को विवाह के प्रथम श्रावण में पिता के घर (पीहर) में तथा शेष चार वर्ष पति के घर (ससुराल) में करने का विधान है।

श्रावण मास के सोमवार का महत्व Astrology

Anirudh Sharma

अनिरुद्ध शर्मा श्रावण मास कहो या सावन का महीना कोई भी शब्‍द कानों में पड़ते ही शीतलता स्‍वत: ही प्राप्‍त हो जाती है। ज्‍येष्‍ठ और आषाढ़ की भीषण गर्मी और तपिश से मुक्ति दिलाने हेतु श्रावण मास का आगमन होता है। श्रावण मास की प्रतीक्षा मनुष्‍य, पशु-प‍क्षी व प्रकृति ही नहीं करते अपितु देव और किन्‍नरों को भी इसका इंतजार रहता है।

मंदिर में खुले आसमान के नीचे विराजते हैं भोलेनाथ Astrology

agency

भक्त अपने भगवान को हर विधि से प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं और वे यह कभी नहीं चाहेंगे कि उनके भगवान जिस मंदिर में विराजमान हों उस मंदिर की छत न हो। लेकिन भगवान की इच्छा ही जब खुले आसमान के नीचे रहने की हो तो भक्त बेबस हो जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है रामराज के सैफपुर फिरोजपुर में स्थित सिद्धपीठ शिव भगवान का मंदिर।

श्रीमती प्रतिभा पाटिल-ज्योतिषीय विश्‍लेषण Astrology

Hindi Lok

भारतीय संसद की 12वी तथा प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल का जन्म महाराष्ट्र के जलगांव जिले के नदगांव मे 19 दिसम्बर 1934 में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा जलगांव के आर.आर. विद्यालय में हुई थी, बाद में आपने जलगांव कालेज से इकॉनोमिक्स एवं राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। भारतीय लोकतन्त्र के सर्वोच्च पद पर पहुंचने का गौरव आपको हासिल हुआ। आज हम इनकी कुन्डली का सम्यक अध्ययन करके यह जानने की कोशिश करेंगे कि ज्योतिष में वह कौन-कौन से राजयोग हैं, जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण राजयोग का फल भोगता है। भारत के सर्वोच्च सम्माननीय पद पर आसीन होने के लिये कौन से योग होते हैं।

शिव शंकर का प्रिय माह सावन Astrology

Pt. Rajesh Kumar Sharma

पं0 राजेश कुमार शर्मा हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन महीने को देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया।

शिव और पार्वती का निवासस्‍थल : कैलाश मानसरोवर Astrology

Anirudh Sharma

अनिरुद्ध शर्मा हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ‘कैलाश’ को भगवान शंकर और मॉ पार्वती का निवासस्‍थल माना जाता है। भगवान शिव अपने समस्त गणों के साथ इसी आलौकिक स्थान पर रहकर तीनों लोक तथा चौदहों भुवन पर अपनी कृपादृष्टि रखते है। शिवपुराण के अनुसार कुबेर ने इसी स्थान पर कठिन तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न हो भगवान शिव ने कैलाश को अपना निवास स्थान तथा कुबेर को सखा बनाने का वरदान दिया था। शास्त्रों के अनुसार इसी स्थान को पृथ्वी का स्वर्ग एवं कुबेर की अलकापुरी की संज्ञा भी दी गयी है। कैलाश पर्वत बर्फ से ढ़के शिवलिंग के रूप में आठ पहाड़ों से घिरा ऐसा प्रतीत होता है मानो अष्टदल कमल पुष्प हो। कैलाश पर्वत की समुद्रतल से ऊँचाई 22027 फीट तथा बाहरी परिक्रमापथ 62 किमी0 है।

गुरु के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व: गुरु पूर्णिमा Astrology

Anirudh Sharma

अनिरुद्ध शर्मा गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात्परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः।। गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु ही देवादिदेव महादेव हैं। गुरु साक्षात् परब्रह्म परमात्मा के समान हैं। अतः गुरु को मेरा सर्वदा शत्-शत् नमन है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। गुरुपूर्णिमा अर्थात् गुरु के प्रति आभार एवं कृतज्ञता प्रकट करने का दिन। अतः सभी शिष्य इस तिथि पर अपने-अपने गुरुओं का पूजन करते हैं। भारतीय संस्कृति की प्रतीक यह गुरुपूजा समस्त भारत में ही नहीं अपितु संसार भर में प्रसिद्ध है, जिसे व्यासपूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सम्पूर्ण भारतवर्ष में गुरु पूजन एवं वन्दन होता है। शिष्यगण दूर-दूर से गुरु के धाम आकर श्रद्धापूर्वक भेंट अर्थात् गुरुदक्षिणा अर्पित करते हैं तथा आर्शीवाद प्राप्त करते हैं। सम्पूर्ण ब्रजक्षेत्र विशेषतः मथुरा, वृंदावन तथा गोवर्धन में यह गुरुपूजा बड़ी ही श्रद्धा, भक्ति, हर्ष एवं उल्हास के साथ मनायी जाती है। यह पूर्णिमा सबसे बड़ी पूर्णिमा मानी जाती है, क्यूंकि तीनों लोकों में ज्ञान को श्रेष्ठ तथा ज्ञानप्रदाता सद्गुरु को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस पूर्णिमा पर सद्-आचार, सद्-विचार तथा सत्यव्रत का पालन करने से वर्ष की समस्त पूर्णिमाओं का फल प्राप्त होता है।

किस्मत के महाराज करते रहेंगे राज Astrology

Punit Pandey

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्‍तान महेन्‍द्र सिंह धौनी आज भारत में ही नहीं विश्‍व में जाना माना नाम है।

धर्म और आस्‍था का संगम है श्री जगन्‍नाथ पुरी रथयात्रा Astrology

Anirudh Sharma

अनिरुद्ध शर्मा प्रतिवर्ष भारत में आषाढ़ शुक्‍ल द्वितीया को रथयात्रा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष यह रथयात्रा महोत्‍सव 3 जुलाई से 10 जुलाई तक मनाया जाएगा। सबसे प्रतिष्ठित समारोह जगन्नाथ पुरी में मनाया जाता है। यह स्थान भुवनेश्वर से साठ किमी की दूरी पर है। प्राचीन काल में पुरी को पुरुषोत्तम क्षेत्र कहा जाता था। यहां का जगन्नाथ मंदिर अपनी ऐतिहासिक रथयात्रा के लिए सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। पश्चिमी समुद्रतट से लगभग डेढ़ किमी दूर उत्तर में नीलगिरि पर्वत पर स्थित यह प्राचीन मंदिर कलिंग वास्तुशैली में बना 12वीं सदी का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर का निर्माण नरेश चोड़गंग ने करवाया था।

पुरी में देवस्नान के लाखों ने किए दर्शन Astrology

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ओडिसा के पुरी शहर में बुधवार को देश के विभिन्न हिस्सों से आए 200,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने तीन देवताओं के स्नान संस्कार के दर्शन किए। देवस्नान का यह अनुष्ठान प्रसिद्ध रथयात्रा के पहले सम्पन्न होता है। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी।

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