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ज्‍योति‍ष सीखें भाग - 11 Astrology

Punit Pandey

ज्‍योतिष में किसी भी घटना का कालनिर्णय मुख्‍यत: दशा और गोचर के आधार पर किया जाता है। दशा और गोचर में सामान्‍यत: दशा को ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है। वैसे तो दशाएं भी कई होती हैं परन्‍तु हम सबसे प्रचलित विंशोत्‍तरी दशा की चर्चा करेंगे और जानेंगे कि विंशोत्‍तरी दशा का प्रयोग घटना के काल निर्णय में कैसे किया जाए।

वास्तु शास्त्र के मूल नियम Astrology

Acharya Ram Hari Sharma

वास्तुशास्त्र के वैज्ञानिक आधार हैं, और कई बार यह बात साबित हो चुकी है। वास्तु शास्त्र का मूलाधार पांच तत्व हैं।

ज्‍योति‍ष सीखें भाग - 10 Astrology

पुनीत पांडे

किसी कुण्‍डली में क्‍या संभावनाएं हैं, यह ज्‍योतिष में योगों से देखा जाता है। भारतीय ज्‍योतिष में हजारों योगों का वर्णन है जो कि ग्रह, राशि और भावों इत्‍यादि के मिलने से बनते हैं। हम उन सारे योगों का वर्णन न करके, सिर्फ कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों का वर्णन करेंगे जिससे हमें पता चलेगा कि जातक कितना सफल और समृद्ध होगा। सफतला, समृद्धि और खुशहाली को मैं 'संभावना' कहूंगा।

लाल किताब को खारिज मत कीजिए Astrology

Kulbir Bains

ज्योतिष की इतनी सारी विधाएँ मौजूद हैं, तो किसी को लाल किताब के ज्योतिषी से संपर्क करने की क्या ज़रूरत है? ये सवाल अक्सर पूछा जाता है। आइए, पहले इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करें।

12 राशियों पर मीन राशि के गुरु का प्रभाव Astrology

अंकुश खुंगर

बृहस्पति २ मई, २०१० को अपनी राशि परिवर्तित कर रहा है और यह कुम्भ से मीन राशि में प्रवेश करेगा।

ज्‍योति‍ष सीखें भाग - 9 Astrology

Punit Pandey

यह जानना बहुत जरूरी है कि कोई ग्रह जातक को क्या फल देगा। कोई ग्रह कैसा फल देगा, वह उसकी कुण्डली में स्थिति, युति एवं दृष्टि आदि पर निर्भर करता है। जो ग्रह जितना ज्यादा शुभ होगा, अपने कारकत्व को और जिस भाव में वह स्थित है,

ज्‍योति‍ष सीखें भाग-8 Astrology

पुनीत पांडे

किसी भी अन्‍य विषय की तरह ज्‍योतिष की अपनी शब्‍दावली है। ज्‍योतिष के लेखों को, ज्‍योतिष की पुस्‍तकों को आदि समझने के लिए शब्‍दावली को जानना जरूरी है। सबसे पहले हम भाव से जुड़े हुए कुछ महत्‍वपूर्ण संज्ञाओं को जानते हैं -

ज्योतिष सीखें भाग-7 Astrology

पुनीत पांडे

पिछले अंक में हमनें राशि के स्‍वाभाव के बारे में जाना। हमने यह भी जाना कि कारकात्‍व एवं स्‍वभाव में क्‍या फर्क होता है। इस बार पहले हम ग्रहों के बारे में जानते हैं। नवग्रह के कारकत्‍व एवं स्‍वभाव इस प्रकार हैं

ज्‍योति‍ष सीखें भाग-6 Astrology

पुनीत पांडे

पिछले अंक में हमनें भाव कारकत्‍व के बारे में जाना। हमने यह भी जाना कि कारकात्‍व एवं स्‍वभाव में क्‍या फर्क होता है। इस बार पहले हम राशियों के बारे में जानते हैं। राशियों के स्‍वभाव इस प्रकार हैं-

ज्‍योति‍ष सीखें भाग-5 Astrology

पुनीत पांडे

ज्योतिष मैं फलकथन का आधार मुख्यतः ग्रहों, राशियों और भावों का स्वाभाव, कारकत्‍व एवं उनका आपसी संबध है।

ज्योतिष लेख