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12 राशियों पर मीन राशि के गुरु का प्रभाव Astrology

अंकुश खुंगर

बृहस्पति २ मई, २०१० को अपनी राशि परिवर्तित कर रहा है और यह कुम्भ से मीन राशि में प्रवेश करेगा।

ज्‍योति‍ष सीखें भाग - 9 Astrology

Punit Pandey

यह जानना बहुत जरूरी है कि कोई ग्रह जातक को क्या फल देगा। कोई ग्रह कैसा फल देगा, वह उसकी कुण्डली में स्थिति, युति एवं दृष्टि आदि पर निर्भर करता है। जो ग्रह जितना ज्यादा शुभ होगा, अपने कारकत्व को और जिस भाव में वह स्थित है,

ज्‍योति‍ष सीखें भाग-8 Astrology

पुनीत पांडे

किसी भी अन्‍य विषय की तरह ज्‍योतिष की अपनी शब्‍दावली है। ज्‍योतिष के लेखों को, ज्‍योतिष की पुस्‍तकों को आदि समझने के लिए शब्‍दावली को जानना जरूरी है। सबसे पहले हम भाव से जुड़े हुए कुछ महत्‍वपूर्ण संज्ञाओं को जानते हैं -

ज्योतिष सीखें भाग-7 Astrology

पुनीत पांडे

पिछले अंक में हमनें राशि के स्‍वाभाव के बारे में जाना। हमने यह भी जाना कि कारकात्‍व एवं स्‍वभाव में क्‍या फर्क होता है। इस बार पहले हम ग्रहों के बारे में जानते हैं। नवग्रह के कारकत्‍व एवं स्‍वभाव इस प्रकार हैं

ज्‍योति‍ष सीखें भाग-6 Astrology

पुनीत पांडे

पिछले अंक में हमनें भाव कारकत्‍व के बारे में जाना। हमने यह भी जाना कि कारकात्‍व एवं स्‍वभाव में क्‍या फर्क होता है। इस बार पहले हम राशियों के बारे में जानते हैं। राशियों के स्‍वभाव इस प्रकार हैं-

ज्‍योति‍ष सीखें भाग-5 Astrology

पुनीत पांडे

ज्योतिष मैं फलकथन का आधार मुख्यतः ग्रहों, राशियों और भावों का स्वाभाव, कारकत्‍व एवं उनका आपसी संबध है।

ज्‍योतिष सीखें भाग-4 Astrology

पुनीत पांडे

इस सप्‍ताह हम जानेंगे की कुण्‍डली में ग्रह एवं राशि इत्‍यादि को कैसे दर्शाया जाता है। साथ ही लग्‍न एवं अन्‍य भावों के बारे में भी जानेंगे। कुण्‍डली को जन्‍म समय के ग्रहों की स्थिति की तस्‍वीर कहा जा सकता है। कुण्‍डली को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि जन्‍म समय में विभिन्‍न ग्रह आकाश में कहां स्थित थे। भारत में विभिन्‍न प्रान्‍तों में कुण्‍डली को चित्रित करने का अलग अलग तरीका है। मुख्‍यत: कुण्‍डली को उत्‍तर भारत, दक्षिण भारत या बंगाल में अलग अलग तरीके से दिखाया जाता है। हम सिर्फ उत्‍तर भारतीय तरीके की चर्चा करेंगे।

शयनकक्ष से जुड़ी सावधानियां बचा सकती हैं संबंध Astrology

प.राजेश शर्मा

व्यक्ति जब अपनी यौन अवस्था में पहुंचता है तो परिवार के बड़े बुजुर्गों को उसके विवाह की चिन्ताएं सतानी प्रारम्भ कर देती हैं। विवाह के पश्चात पति-पत्नी के मध्य बहुत ही आत्म प्रेम सम्बन्ध बन जाते हैं। लेकिन किसी किसी के मध्य कुछ माह अथवा कुछ वर्षों के पश्चात ही मन मुटाव की वह सीमाऐं पहुंच जाती हैं कि दोनों में से कोई एक दूसरे को देखना तक पसन्द नहीं करता। कई बार स्थिति इतनी विकट हो जाती हैं कि तलाक ही हल लगता है।

ज्‍योतिष सीखें - भाग 3 Astrology

punit pandey

पिछली बार हमने प्रत्येक ग्रह की उच्च नीच और स्वग्रह राशि के बारे में जाना था। हमनें पढ़ा था कि राहु और केतु की कोई राशि नहीं होती और राहु-केतु की उच्च एवं नीच राशियां भी सभी ज्योतिषी प्रयोग नहीं करते। लेकिन, फलित ज्योतिष में ग्रहों के मित्र, शत्रु ग्रह के बारे में जानना भी अति आवश्यक है। इसलिए इस बार इनकी जानकारी।

ज्‍योतिष सीखें - भाग 2 Astrology

punit pandey

हम ग्रह एवं राशियों के कुछ वर्गीकरण को जानेंगे जो कि फलित ज्‍योतिष के लिए अत्‍यन्‍त ही महत्‍वपूर्ण हैं। पहला वर्गीकरण शुभ ग्रह और पाप ग्रह का इस प्रकार है -

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