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लाइटरों का दिलचस्प इतिहास बयां करता अनूठा संग्रह

the unique collection of lighters tells the intresting history

 8 जून 2012 

 नई दिल्ली। कभी फैशनपरस्त स्मार्ट लोगों की खास पसंद रहे सिगरेट   लाइटर अब कला संग्राहकों के लिए धरोधर बनते जा रहे हैं। यहां के एक स्वतंत्र कला संग्राहक के घर में संरक्षित सैकड़ों सिगरेट लाइटर अपना रोचक इतिहास बयां करते हैं। आदित्य पॉल नामक इस कला पारखी ने इन दुर्लभ सिगरेट लाइटरों को कालक्रमानुसार संरक्षित किया है, ताकि इनकी विकास यात्रा का इतिहास आसानी से जाना जा सके। इस रोचक संग्रह में भारत में ब्रिटिश राज से लेकर दोनों विश्व युद्धों, कम्युनिस्ट आंदोलन और हिप्पी जमाने के सिगरेट लाइटर शामिल हैं। इस संग्रह में सर्वाधिक बिकाऊ डिजाइनर लाइटरों में शुमार आउटडोर जि़प्पो लाइटरों को भी शामिल किया गया है। करीब 1,000 लाइटरों का उनका यह संग्रह इस वस्तु के एक सदी लम्बे इतिहास को बयां करता है।

लाइटरों की कहानी साम्राज्यवाद, युद्धों, आर्थिक समृद्धि, अभिजात्यवाद, सिनेमा, तम्बाकू उपभोग संस्कृति, भूमंडलीकरण और धूम्रपान की गहराती प्रवृत्ति से जुड़ी है। 39 वर्षीय पॉल कहते हैं, "मैंने इन लाइटरों को उनके निर्माणकाल के अनुसार क्रमवार संरक्षित किया है, ताकि इनके इतिहास से आसानी से अवगत हुआ जा सके।"

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "हमारे संग्रह में सर्वाधिक दुर्लभ एवं आकर्षक लाइटरों में से एक है किंग जॉर्ज स्ट्राइक लाइटर जो 1936 का है। किंग जॉर्ज छठे ने अपने राज्याभिषेक के मौके पर मेहमानों को अपनी तस्वीर वाला यह लाइटर भेंट किया था।"

पेशे से बिजनेस कंसल्टेंट पॉल ने बताया कि यह भारी भरकम कांस्य टेबल लाइटर करीब 10 इंच लम्बा है और इस पर किंग जॉर्ज छठे, जो एलिजाबेथ द्वितीय के पिता थे, की सम्पूर्ण तस्वीर बनी है। इसमें उन्हें राजसी पोशाक एवं तलवार से लैस दिखाया गया है। लाइटर पर बनी उनकी तस्वीर जटिल नक्काशी का दुर्लभ नमूना है जिसे किसी सधे हुए नक्काश ने बनाया होगा। तस्वीर की बगल में एक मेज पर एक स्ट्राइक लाइट बॉक्स को दर्शाया गया है।

चांदी का एक आर्मर्ड नाइट लाइटर भी दुर्लभ धरोहर है। 12 इंच लम्बा यह लाइटर दिलकश नक्काशी से युक्त संग्रहणीय लाइटर का एक और नमूना है, जिन्हें शाही अंदाज में जिंदगी जीने के शौकीनों की पसंद माना जाता था। 1940 के दशक में अमरीका में बना हैमिल्टन्स शिपव्हील लाइटर भी कम आकर्षक नहीं है। यह लाइटर किसी जहाल के व्हील जैसा दिखता है, जिस पर क्रोम का प्लेट चढ़ा हुआ है। व्हील को घुमाते ही इसमें लगी पट्टी से स्टिक निकलने लगता है, जिससे लाइटर को जलाया जा सकता है।

यहां सर्वाधिक पुराने लाइटरों में से एक है 1912 का फूजिमा लिट आर्म पेट्रोल लाइटर। पॉल कहते हैं, "लम्बे समय तक इंडोर इस्तेमाल वाले भारी लाइटरों का जमाना रहा, पर 1932 में जॉर्ज ब्लेसडेल ने जिप्पो लाइटर विकसित कर लाइटर तकनीकी में क्रांति ला दी। जिप्पो लाइटर आउटडोर इस्तेमाल के लिए था।" इनके पास उपलब्ध जिप्पो लाइटर इसके करीब 80 साल पुराने इतिहास पर रोशनी डालते हैं। पॉल कहते हैं, "दादा जी द्वारा दिए गए जिप्पो लाइटर से ही मैंने इस संग्रह का सफर शुरू किया था।"

 

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