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विद्यालयों में दिखानी चाहिए 'मिनुगुरुलु' : शेखर

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12 सितम्बर 2013
चेन्नई|
फिल्मकार शेखर कामुला आने वाली तेलुगू फिल्म 'मिनुगुरुलु' से इतने प्रभावित हैं कि वह चाहते हैं कि सरकार यह फिल्म विद्यालयों में दिखाए। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसी फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे।

अयोध्या कुमार के निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'मिनुगुरुलु' 14 साल के एक अनाथ और दृष्टिहीन बच्चे की कहानी है जो अन्य अनाथ बच्चों की मदद से एक वृत्तचित्र बनाता है।

शेखर ने आईएएनएस को बताया, "यह जबरदस्त फिल्म है। मैं ऐसी फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाउंगा। मैं निर्देशक की प्रशंसा करता हूं। मैं चाहता हूं कि सरकार यह फिल्म विद्यालयों में दिखाए। यह फिल्म विद्यालयों के छोटे-छोटे बच्चों के लिए बहुत प्रेरणादायक होगी।"

उन्होंने कहा, "मैं तो यह भी चाहता हूं कि इस तरह की फिल्में भी सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शित होनी चाहिए। जैसे मनोरंजनक व्यावसायिक फिल्मों को प्रदर्शित करने की आवश्यकता है, वैसे ही कभी-कभी 'मिनुगुरुलु' जैसी रचनात्मक फिल्मों को प्रदर्शित करने की भी जरूरत है।"

जल्द ही प्रदर्शित होने जा रही 'मिनुगुरुलु' में सुहासिनी मणिरत्नम, आशीष विद्यार्थी, रघुवीर यादव और दीपक भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

इस बीच शेखर तमिल और तेलुगू फिल्म 'अनामिका' में व्यस्त हैं। यह फिल्म विद्या बालन अभिनीत 'कहानी' का दक्षिण-भारतीय संस्करण है।
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