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सावन का पहला सोमवार, भक्ति में डूबे शिव भक्त

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18 जुलाई 2011

नई दिल्ली/लखनऊ/पटना/उज्जैन। सावन के पहले सोमवार के अवसर पर देशभर के मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा रहा। दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य देव शिव की विशेष पूजा-अर्चना की।

दिल्ली में सावन के पहले सोमवार पर धार्मिक माहौल रहा। सुबह से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर भगवान शिव को जल, दूध व बेल पत्र अर्पित करने के लिए विभिन्न शिवालयों के बाहर इंतजार करते देखे गए। इस अवसर पर कई भक्तों ने तो व्रत भी रखा।

सावन मास के पहले सोमवार के मौके पर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर सहित उत्तर प्रदेश के अन्य शिवालयों में श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में पहुंचकर पूजा-अर्चना की।

वाराणसी (काशी) स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर में तड़के से ही दूर-दूर से आए भक्त लम्बी कतारों में लगे थे। पवित्र गंगा नदी में स्नान करने के बाद हाथों में बेल पत्र, धतूरा और दूध लिए भक्तों ने बारी-बारी से भगवान शिव की आराधना की।

विश्वनाथ मंदिर के एक पुजारी पंडित ओंकार नाथ शास्त्री ने संवाददाताओं को बताया कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव की भक्तों पर खास कृपा होती है। बाबा भोले की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वाराणसी के पुलिस उपमहानिरीक्षक लाल जी शुक्ला ने संवाददाताओं को बताया कि भक्तों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

विश्वनाथ मंदिर के अलावा कानपुर, लखनऊ, इलाहबाद और बरेली के शिवमंदिरों में भी भक्तों का हुजूम रहा। बम बम भोले और हर हर महादेव के मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने मंदिरों में भगवान शिव पर दूध, जल, शहद और बेल पत्र चढ़ाया।

इस अवसर पर शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक झारखण्ड के देवघर स्थित कामना लिंग (बैद्यनाथ धाम) सहित बिहार और झारखण्ड के सभी शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए शिवभक्तों की भारी भीड़ रही। बैद्यनाथ धाम में तो कांवड़ियों की छह किलोमीटर लम्बी कतार लगी रही।

सुल्तानगंज से गंगा का पवित्र जल उठाकर 105 किलोमीटर लम्बी पैदल यात्रा कर कांवड़िये बैद्यनाथ धाम पहुंचकर कामना लिंग पर जलाभिषेक करते हैं। तड़के तीन बजे की विशेष पूजा के बाद से ही यहां जलाभिषेक प्रारम्भ हो गया था।

देवघर के पुलिस अधीक्षक सुबोध प्रसाद ने बताया कि कांवड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सादे लिबास में भी पुलिस बल को तैनात किया गया है।

आचायरें के मुताबिक सावन में खासकर सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, शांति मिलती है, भगवान भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

झारखण्ड की राजधानी रांची में पहाड़ी मंदिर में भी भक्तों का हुजूम रहा। बिहार के भी मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, रोहतास सहित सभी शिवालयों में सुबह से ही भीड़ रही।

उधर, प्रमुख ज्योतिर्लिगों में से एक महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में महाकाल की सवारी निकली गई। सवारी पर निकले महाकाल के दर्शन कर भक्तजनों ने मनोकामना की अर्जी लगाई।

मान्यता है कि महाकाल उज्जैन के महाराजा हैं और वह श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं। पालकी में सवार बाबा महाकाल को प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस जवानों की टुकड़ी ने 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया और फिर सवारी चल पड़ी नगर भ्रमण पर।

महाकाल की सवारी का जगह-जगह स्वागत किया गया। भक्तों ने उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आराधना की। जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई तथा भक्तों ने 'बमबम भोले' के जयकारे लगाए। श्रावण मास के सभी चारों सोमवार को इसी तरह बाबा महाकाल की सवारी निकलेगी।

श्रावण मास के पहले सोमवार को सुबह महाकालेश्वर के दरबार में विशेष भस्म-आरती हुई। यहां देश भर के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे भक्तों ने पूजा-अर्चना की।

इसके अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में स्थित देवालयों में पहुंचे भक्तों ने भगवान शिव की आराधना की। खरगोन में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर एवं खजुराहो के मतंगेश्वर मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ रही।

 

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