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सलवा जुडूम में जनजातियों की भर्ती पर लगे रोक : न्यायालय

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6 जुलाई 2011

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को नक्सलियों के खिलाफ आतंकवाद निरोधी अभियान सलवा जुडूम में विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) के रूप में जनजातियों का इस्तेमाल करने पर छत्तीसगढ़ सरकार की निंदा की और कहा कि इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

न्यायालय ने नियमित पुलिस अधिकारियों के किसी भी दायित्व को निभाने के लिए एसपीओ की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया।

न्यायालय ने राज्य सरकार को अपने नक्सली विरोधी अभियानों में मानवाधिकारों का हनन करने और सलवा जुडूम का इस्तेमाल करने पर उसकी खिंचाई की। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार भी उन्हीं तरीकों को अपना रही है जिसे एक बार नक्सलियों ने अपनाया।

न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश एस.एस. निज्जर की पीठ ने अपने फैसले में छत्तीसगढ़ सरकार को जनजातीयों को एसपीओ के रूप में भर्ती करने पर तुरंत 'रोक' लगाने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने कहा कि अप्रशिक्षित एवं अयोग्य जनजातियों का एसपीओ के रूप में इस्तेमाल सरकार के नैतिक एवं संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है।

न्यायाधीशों ने कहा कि सरकार एक तरफ निजी क्षेत्र को कर में छूट के बाद छूट देती है और दूसरी ओर राजस्व की कमी का हवाला देती है। यह एक मुख्य कारण है जिसके चलते वह सामाजिक कल्याण के उपायों के तहत गरीबों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं दे पाती है।

न्यायालय ने कहा, "अमीरों के लिए कर में छूट और गरीब युवाओं के लिए बंदूक जिससे कि वे आपस में लड़ते रहें, यह सुरक्षा अधिकारियों और राज्य की आर्थिक नीतियों का नया मंत्र मालूम पड़ता है।"

न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया कि वह एसपीओ को दिए गए सभी हथियार, गोला-बारूद वापस ले ले। न्यायालय ने केंद्र सरकार को भी यह सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया कि उसके द्वारा मुहैया कराई जाने वाली धनराशि का इस्तेमाल इस तरह की अवैध गतिविधियों के वित्तपोषण में न हो।

न्यायालय ने अपने निर्देशों पर केंद्र और राज्य सरकारों से अपनी अनुपालन रिपोर्ट छह सप्ताह के भीतर दाखिल करने के लिए कहा और मामले की अगली सुनवाई सितम्बर के पहले महीने में करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के ऊपर राज्य के एक जनजातीय इलाके में 23 मार्च, 2011 को हुए हमले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का भी आदेश दिया।

न्यायालय ने यह आदेश दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नंदिनी सुंदर की एक याचिका पर दिया है। सुंदर ने अपनी याचिका में सलवा जुडूम की गतिविधियों पर रोक लगाने और आंतरिक रूप से विस्थापित जनजातियों के राहत एवं पुनर्वास की मांग की थी।


 

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