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भारत ने किया समुद्री लुटेरों से मिलकर लड़ने का आह्वान

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27 मई 2011

अदिस अबाबा। अफ्रीका के साथ भारत के बढ़ते सम्बंधों को कूटनीति महत्व देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को महाद्वीप में लोकतांत्रिक बदलाव पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में समुद्री लूट एवं आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई छेड़ने का आग्रह किया।

मनमोहन सिंह ने इथोपिया की संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए कहा, "पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका में बदलाव की बयार बह रही है। हमारा मानना है कि अपना भविष्य चुनने और विकास का अपना खुद का रास्ता अख्तियार करने के लिए यह सभी लोगों का अधिकार है।"

ज्ञात हो कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने पहली बार इथोपिया की संसद को सम्बोधित किया है। प्रधानमंत्री पिछले कुछ महीनों में उत्तर अफ्रीका के कई देशों में परिवर्तन एवं लोकतंत्र के समर्थन में चले लोकप्रिय आंदोलनों की प्रशंसा कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई निश्चित रूप से कानून पर आधारित और संयुक्त राष्ट्र की रूपरेखा के भीतर होनी चाहिए। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का समर्थन करते हैं।"

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री का यह इशारा लीबिया में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों की तरफ था जिस पर भारत ने अपनी असहमति प्रकट की है।

अफ्रीका के साथ अपने सामरिक सम्बंधों को और मजबूत करने के क्रम में मनमोहन सिंह ने हिंद महासागर में आतंकवाद और समुद्री लूट के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, "हॉर्न ऑफ अफ्रीका को आज समुद्री लूट और आतंकवाद की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लाल सागर और सोमालिया का तट अंतर्राष्ट्रीय समुद्री लूट का एक व्यवस्थित उद्योग बन गया है।"

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से लाल सागर और सोमालिया के पास समुद्री डाकुओं के खतरे से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया।

 

 

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