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'गुलाबी गैंग' और 'गुलाब गैंग' आमने-सामने

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5 मार्च 2014
बांदा।
इन दिनों नायिका प्रधान फिल्म गुलाब गैंग की नायिका माधुरी दीक्षित, खलनायिका के रूप में जूही चावला, निर्माता अनुभव सिन्हा और लेखक-निर्देशक सौमिक सेन की इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया तथा अन्य प्रचार माध्यमों में खूब चर्चा है, मगर बुंदेलखंड (बांदा) के गुलाबी गैंग और कमांडर संपत पाल की जिस मौलिक कहानी पर यह फिल्म बनी है, उसका कोई योगदान स्वीकार करने को तैयार नहीं है, बल्कि निर्माता-निर्देशक कहते हैं कि हमारी फिल्म का गुलाबी गैंग से कोई संबंध नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर 7 मार्च को फिल्म प्रदर्शित होने वाली है। इस पृष्ठ भूमि पर 'गुलाबी गैंग' जनसंगठन के राष्ट्रीय संयोजक एवं सहसंस्थापक जयप्रकाश शिवहरे उर्फ बाबूजी का कहना है कि मुंबई के वकील एस.सी. पाल के नोटिस के जवाब में निर्माता, निर्देशक ने विस्तृत उत्तर देने की भ्रामक बातें कहकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया है और आज तक संपर्क नहीं किया।

उधर, गुलाब गैंग के प्रदर्शन पर कमांडर संपत पाल ने अपना अधिकृत ऐतराज जता दिया है, प्रशासनिक स्तर पर भी रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है। यदि इतने पर भी बात नहीं बनती है तो संगठन रैली, धरना प्रदर्शन, अनशन की कार्रवाई करेगा। पहले रिपोर्ट से, फिर कोर्ट से उसके बाद भी नहीं माने तो बांस कोर्ट (बांस का डंडा जो गुलाबी गैंग का निशान है इसको लेकर गुलाबी गैंग की महिलाएं चलती हैं) से मनवाया जाएगा।

गुलाब गैंग की कहानी किसी कपोल कल्पना पर आधारित नहीं, बल्कि बुंदेलखंड में वास्तव में महिलाओं की लड़ाई लड़ रहीं गुलाबी गैंग की कमांडर संपत पाल के चरित्र की कहानी पर बनी फिल्म है। यह बात अलग है कि गुलाब गैंग फिल्म के लेखक, निदेशक सौमिक सेन उसे स्वीकार नहीं करते।

उनका कहना है कि गुलाबी गैंग से मेरी फिल्म गुलाब गैंग का कोई संबंध नहीं है। हालांकि वह गुलाबी गैंग कमांडर की तारीफ तो करते हैं। कहते हैं कि सम्पत पाल बहुत अच्छा काम कर रही हैं उनके गैंग का काम मुख्य रूप से बद्तमीज पतियों को रास्ते पर लाना है जब कि उनकी फिल्म में बालिकाओं की शिक्षा एक बड़ा मुद्दा है उनको आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश है ताकि वे इस दुनिया में स्वयं की मेहनत के दम पर जी सकें।

वास्तव में सौमिक सेन ने गुलाबी गैंग के मूल विचारधारा को आधार बनाकर ही अपनी कहानी का ताना-बाना बुना है, वही उनकी फिल्म की आत्मा है। वे गुलाब गैंग का शीर्षक भले ही एरो स्मिथ के गीत दि पिंक इज रेड के भाव को बताते हों और कहते हों कि गुलाबी रंग लाल के बहुत नजदीक होता है और कभी-कभी खतरनाक भी।

यदि ऐसा है तब उन्होंने अपनी फिल्म का शीर्षक 'पिंक इज रेड' या 'लाल गैंग' क्यों नही रख लिया? उन्हें गुलाब गैंग रखने का विचार कहां से आया? वास्तव मंे यह बुंदेलखंड (बांदा) के गुलाबी गैंग से ही प्रभावित होकर रखा गया है।

संपत पाल को गुलाबी गैंग की कहानी पर गुलाब गैंग फिल्म बनने की सर्वप्रथम जानकारी अप्रैल 2012 में हुई। जैसे ही उन्हें जानकारी हुई तो उन्होंने कहा कि बिना अनुमति यदि उनके जीवन पर फिल्म बनायी तो वह अदालत जाएंगी। "यदि किसी को फिल्म बनानी है तो पहले मुझसे अनुमति ले लें फिल्म की स्क्रिप्ट दिखाएं, तब फिल्म निर्माण करें।"

निर्माता अनुभव सिन्हा ने उसी समय दावा किया कि उनकी फिल्म उत्तर प्रदेश के किसी संगठन या महिला के जीवन से प्रेरित नहीं है। ये विवादास्पद बाते दोनों ओर से आई और हो गई, किंतु इनका कोई निराकरण नहीं हुआ।

एक वर्ष बाद मई जून 2013 में 'गुलाब गैंग' फिल्म की फिर खबर आई तो संपत पाल ने मुंबई के वकील एस.सी. पाल व एम. सेठना के माध्यम से 13 जून 2013 को निर्माता, निर्देशक को कानूनी नोटिस भेजा जिसके संबंध में उन्होंने परीक्षण करने सम्बन्धी गोलमाल जवाब दिया और कहा कि हम विस्तृत उत्तर बाद मंे देंगे मगर उनका उत्तर अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।

मामला बड़ा ही रोचक बनता जा रहा है। दोनों तरफ से अपनी-अपनी तैयारियां हैं। गुलाब गैंग के निर्माता निर्देशक ने फिल्म का प्रचार प्रारंभ कर दिया है। इधर गुलाबी गैंग जनसंगठन की कमांडर संपत पाल, राष्ट्रीय संयोजक जयप्रकाश शिवहरे सहित अन्य पदाधिकारी प्रदर्शन रुकवाने के लिए कमर कस चुके हैं। असली शक्ति परीक्षण 7 मार्च को देखने को मिलेगा।
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