विप्लव एक आला न्यूज चैनल का उदीयमान रिपोर्टर था. रोजाना किसी एक्सक्लूसिव खबर की तलाश में निकलता और अपने बास को निराश न करता. उस दिन भी वह किसी स्टोरी की तलाश में सालाना भरने वाले अमावस के मेले में अपने सहायक के साथ धूल फाँकता घूम रहा था. अचानक विस्फोट की एक आवाज आयी और चारों ओर भगदड़ और अफरातफरी मच गयी. सहायक मारे घबराहट के काँपने लगा, मगर दूरदर्शी विप्लव ने उसे तुरंत कैमरा आनप करने का आदेश दिया. चारों तरफ मची भगदड़ और यहाँ वहाँ फैली लाशों के विजुअल्स फटाफट लिये जाने लगे. अचानक एक दृश्य पर कैमरा फोकस होते ही सहायक चीख पड़ा, ”सर, देखिये...एक छोटी सी बच्ची नीचे गिर गयी है, यदि किसी के पैरों तले आ गयी तो... मैं उसे उठाने जा रहा हूँ“
विप्लव ने सहायक को डपटा, ”बेवकूफ, कैमरा उसी बच्ची पर फोकस रख. यही तो वह एक्सक्लूसिव सीन है जो सिर्फ हमारे चैनल पर आएगा और हमंे नंबर वन तक पहुंचाएगा,“ उस पूरे दिन दर्शकों ने टी.वी. पर कदमों तले दम तोड़ती उस बच्ची को कई बार देखा. साथ ही विप्लव की यह आवाज भी सुनी कि मानव संवेदनाएँ कैसे सो गयीं. जब एक बच्ची पैरों तले रौंदी जाती रही और कोई उसे उठाने आगे नहीं आया.