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कश्मीर आतंकवाद से अलकायदा का कोई सम्बंध नहीं : उमर

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9 मई 2011

श्रीनगर। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि राज्य में आतंकवाद और अलकायदा के बीच सम्बंध साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है।

उमर ने यहां संवाददाताओं को बताया, "यद्यपि ओसामा बिन लादेन ने कश्मीर को अपने संगठन का अधूरा एजेंडा बताया था लेकिन मेरी अध्यक्षता में एकीकृत कमान की जितनी बैठकें हुईं हैं, मुझे सबूत का एक भी ऐसा टुकड़ा अभी तक नहीं देखने को मिला, जिससे अलकायदा और यहां जारी आतंकवाद के बीच कोई सूत्र जुड़ता हो।"

उमर अब्दुल्ला मानते हैं कि लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद पैदा हुई कड़वाहट का भारत-पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया की रफ्तार पर कोई असर नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, "पाकिस्तान की ओर से बयान आए हैं कि हमें कोई दुस्साहस नहीं करना चाहिए। हम इस तरह का कोई दुस्साहस करने के बारे में सोच भी नहीं रहे हैं। हमारे विदेश सचिव ने स्पष्ट किया है कि हम पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया जारी रखेंगे।"

उमर ने आशा जाहिर की कि दोनों पड़ोसियों के बीच सतत संवाद के जरिए कश्मीर की पुरानी समस्या सुलझ जाएगी। उन्होंने कहा, "लेकिन वह समाधान कश्मीर के लोगों को स्वीकार्य भी होना चाहिए।"

उमर ने अलगाववादियों से भी अपील की कि उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच बातचीत में शामिल होना चाहिए।

उमर द्वारा ट्विटर पर पोस्ट की गई कुछ टिप्पणियों पर कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी द्वारा जाहिर की गई आपत्ति के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, "संदर्भ से बाहर की टिप्पणियां स्थिति को और बिगाड़ेंगी। क्योंकि मैंने जो कहा था, उस पर गिलानी साहब, जो कि एक वरिष्ठ नेता है, को बंद का आह्वान कर लोगों के लिए असुविधा नहीं पैदा करनी चाहिए। मैं ईमानदारी के साथ उनसे अपील करता हूं कि हम अपने मतभेदों को किसी सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित कर सकते हैं, न कि जनता के लिए असुविधा पैदा कर।"

उमर ने कहा कि कश्मीर के लोग चाहते हैं कि शांतिपूर्ण वातावरण बना रहे ताकि विकास कार्य गति पकड़ सकें। उन्होंने कहा कि अभी तक लगभग 600-700 आतंकवादियों ने मुख्यमंत्री पुनर्वास नीति के तहत अपने आवेदन भेजे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "इनमें से 125 आवेदनों की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।" इस नीति की घोषणा पिछले वर्ष की गई थी। इसका मकसद उन आतंकवादियों का पुनर्वास करना था, जो स्वेच्छा से हिंसा त्यागने और वापस अपने परिवार में आकर नए सिरे से जीवन शुरू करने को तैयार हों।

 

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