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केरल में परम्परागत ढंग से मनाया गया गुड फ्राइडे

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6 अप्रैल 2012
 
तिरूवनंतपुरम |  केरल के सभी गिरजाघरों में शुक्रवार को गुड फ्राइडे परम्परागत ढंग से मनाया गया। राज्यभर में विशेष प्रार्थनाएं की गईं और गिरजाघरों में चोरुका, कांजी परोसे गए।

गुड फ्राइडे को प्रार्थना, तपस्या व उपवास का दिन माना जाता है। करीब 2,000 साल पहले इसी दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था।

इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम 'वे ऑफ द क्रॉस' होता है। इसके तहत ईसा मसीह की माउंट कैल्वरी से 14 स्टेशनों से होते हुए पिलेट्स पैलेस तक की यात्रा की तर्ज पर एक यात्रा निकाली जाती है।

श्रद्धालु स्तुति-गान करते हुए हर स्टेशन पर जाते हैं। इस अवसर पर ईसा मसीह के साथ हुए विश्वासघास, उनकी गिरफ्तारी, मुकदमे व उन्हें सूली पर चढ़ाए जाने की कहानियां सुनाई जाती हैं।

गुड फ्राइडे के अवसर पर सभी गिरजाघरों में चोरुका पीने की परम्परा है। यह ककड़ी के जूस व सिरके से बना पेय होता है।

इस पेय पदार्थ का पीना उस घटना का संकेत है जब ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था तब वहां मौजूद कुछ लोगों ने एक कपड़े को इस सस्ती वाइन में डुबो इसे एक छड़ी पर लपेट कर इसे उन्हें पिलाने की कोशिश की थी।

एक और महत्वपूर्ण परम्परा विशेष प्रार्थना (मास) के बाद कांजी की है। यह भाप में पकाया पानी वाला चावल होता है, जिसे दाल व अचार के साथ परोसा जाता है। इसे गिरजाघर परिसर में ही बनाया जाता है।

गुड फ्राइडे की प्रार्थना सुबह आठ बजे शुरू हुई। ऑर्थोडोक्स चर्च में सबसे लम्बे समय, दोपहर तीन बजे तक प्रार्थना होगी।

केरल की 3.2 करोड़ आबादी में 23 प्रतिशत ईसाई हैं। ज्यादातर ईसाई आबादी कोट्टायम, पथानामथिट्टा, एर्नाकुलम व त्रिशुर में रहती है।

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