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शॉर्ट फिल्मों में नया मुकाम तलाशने की कोशिश : आशीष

director ashish bhatia interview


‘कसौटी ज़िंदगी की ’ से लेकर ‘सरकार-अनकही रिश्तों की कहानी’ तक कई धारावाहिकों में सहायक निर्देशक रहे आशीष भाटिया फिल्मों में निर्देशक संजय गुप्ता के सहायक रहे हैं। बतौर एक्टर अपने करियर की शुरुआत करने वाले लुधियाना की इस युवा प्रतिभा के भीतर का निर्देशक लगातार कुछ नया करने को बेचैन रहता है। इसी कड़ी में आशीष ने अपने भाई और पार्टनर के साथ व्यवसायिक तरीके से शॉर्ट फिल्में बनाने का काम शुरु किया है। दर्शकों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने माध्यम भी इंटरनेट को चुना है। उनके इस अनूठे प्रयोग और इंडस्ट्री में उनके सफर के बारे में बात की पीयूष पांडे ने।

सवाल- आशीष जी, इंडस्ट्री के लोग आपके बारे में जानते हैं। लेकिन, आम लोगों को अपने बारे में कुछ बताइए।

आप पंजाब के रहने वाले हैं तो मुंबई आने का सफर कैसा रहा?

जवाब- मेरा जन्म लुधियाना में हुआ। पढ़ाई चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी से हुई। वहां थिएटर करता था। अपना एक ग्रुप था, जिसके साथ कई नाटक किए। जान-पहचान बढ़ी तो पंजाबी फिल्मों में आना शुरु हुआ। शुरुआती दौर में मैंने एक्टिंग की। कई फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए। लेकिन, उस दौर में पंजाबी फिल्मों में भाई-भतीजावाद बहुत था। बड़े रोल सिर्फ निर्माता-निर्देशको के जान पहचान वालों को मिलते थे। ऐसे में मैंने निर्देशन में हाथ आजमाया और सहायक निर्देशक बन गया। तीन साल में मैंने पंजाब में दस-ग्यारह फिल्में की। मैं उस वक्त वहां इकलौता ऐसा प्रोफेशनल सहायक निर्देशक था, जो मुंबई से आई टीम में शामिल होता था। लिंक बने तो दिल्ली पहुंच गया। अल्फा पंजाबी से जुड़ा। मधुलिका सिद्धू मैडम के साथ मुख्य सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़ा। उनके ही सहयोग से मुंबई पहुंचा। साल २००० की बात है। पहले रामानंद सागर(जी) के साथ जुड़ा। उनके साथ दो साल काम किया और कई सामाजिक धारावाहिकों मसलन 'आंखे' और 'बच के रहना' जैसे धारावाहिकों में काम किया। फिर तो बालाजी टेलीफिल्मस, अरुणा ईरानी और गोल्डी बहल के साथ काम किया। और सफर चल पड़ा।

सवाल- चलिए, अब आपके नए प्रयोग के बारे में बात करते है। फर्स्ट फ्रेम फिल्म्स के बारे में बताइए। यह क्या है और क्या करना चाहते हैं इसके जरिए?

जवाब- देखिए, फर्स्ट फ्रेम फिल्म्स कंपनी की शुरुआत मैंने अपने भाई और अभिनेता नवीन सैनी के साथ 2010 में की। हमारी पहले भी एक कंपनी थी शुभाशीष क्रिएशन के नाम से, लेकिन फर्स्‍ट फ्रेम फिल्‍म्‍स को हमने व्यवसायिक तरीके से शुरु किया। इसके बैनर तले हमनें कई शॉर्ट फिल्में बनायी हैं। एक फिल्म लंदन फिल्म फेस्टिवल में भेजी है- 'लाइफ वर्सेज डेथ'। अभी तक हम १४ शॉर्ट फिल्में फिल्में बना चुके हैं। हमारी कोशिश होती है कि इन शॉर्ट फिल्मों के जरिए एक मैसेज दिया जाए। हमने एक फिल्‍म बनाई थी 'ब्रेकिंग द वाल ऑफ इग्नोरेंस।' इसे बेस्‍ट फिल्‍म का अवॉर्ड मिला था। एक फिल्म बनायी थी 'तीन पंक्चर'। फिल्‍म को पंजाब में शूट किया गया था। इस फिल्म को बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला। अब हम शॉर्ट फिल्मों पर फोकस कर रहे हैं। इसी में नया मुकाम तलाश रहे हैं।

सवाल- तो आप करना क्या चाहते हैं?

जवाब- कई ऐसे मुद्दें हैं, जिन पर समाज में बात नहीं होती, या बहुत कम होती है। हालांकि, टेलीविजन पर कुछ सीरियल में कई गंभीर मसलों पर बात हो रही है, लेकिन उनमें भी आखिर में मसाला लगा दिया जाता है। हम बिना मसाला लगाए अपनी बात कहना चाहते हैं। इस कड़ी में हमने शॉर्ट फिल्मों को इंटरनेट के जरिए लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया है। हमनें यूट्यूब पर अपना एक चैनल बनाया है। वेब बहुत बड़ा मीडियम बनने वाला है।

आजकल फिल्मों का संगीत वेब पर रिलीज किया जा रहा है। हम शुरुआती दिनों में ही बढ़त लेना चाहते हैं। आप यकीं मानिए कि हमारी एक फिल्म को यूट्यूब पर १३ लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

सवाल- तो कमाई कैसे करेंगे?

जवाब- कमाई की संभावनाएं हैं, जिन्हें अभी ठीक से टटोला नहीं गया। कुछ व्यवहारिक दिक्कते भी होती हैं। लेकिन, राजस्व संभव है। हम अपनी शॉर्ट फिल्मों के लिए यूट्यूब से टाइ-अप कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ दूसरे विकल्पों पर भी काम हो रहा है।

सवाल- तो क्या सिर्फ सामाजिक संदेशों वाली शॉर्ट फिल्में बनाएंगे?

जवाब- नहीं...। हम अभी एक वेब कॉमेडी सीरिज 'सेंटी और बंटी' लॉन्च कर रहे हैं। यह बिलकुल हास्य आधारित वेब सीरिज होगी, जिसमें पूरी तरह मनोरंजन होगा। हर दिन एक नया एपिसोड यूट्यूब पर हमारे चैनल में अपलोड किया जाएगा। और महीने के तीसों दिन लोगों को एक नया एपिसोड देखने का मिलेगा। फर्स्ट फ्रेम फिल्म्‍स की वेबसाइट पर भी यह एपिसोड उपलब्‍ध होंगे।

सवाल- शार्ट फिल्म कैसे शूट करते हैं ?

जवाब- मैं फिल्म मेकर हूं। कई लोगों के साथ काम किया है। इसलिए तकनीकी रुप से कम खर्चे में बेहतर फिल्म कैसे बनाई जाए, ये जानता हूं और यही कोशिश भी करता हूं।

सवाल- अभी तक की आपकी निर्देशकीय की पारी के बारे में बताइए?

जवाब- तीन फिल्में संजय गुप्ता के साथ की है। हाल में कुछ पंजाबी फिल्में भी की, जिनमे मैं मुख्‍य सह निर्देशक रहा। सुखमिंदर धंजल के साथ एक फिल्म 'कबड्डी वंस अगैन' हाल ही में पूरी की है।

सवाल- क्या अभी कोई सीरियल कर रहे हैं?

जवाब- नहीं, अभी कोई सीरियल नहीं कर रहा हूं। जिस तरह के सीरियल आजकल हैं, उन्हें करने का एक तो मन नहीं करता। दूसरा वहां काम करने के बाद समय नहीं बचता कि कुछ रचनात्मक किया जा सके।

सवाल- आप निर्देशक हैं तो अपनी फिल्म निर्देशन की कोई योजना नहीं है?

जवाब- बिलकुल है और जल्दी ही योजना पूरी होगी। मेरी कुछ स्क्रिप्ट तैयार हैं, जिन्हें मैं पिच कर रहा हूं। उम्मीद है कि जल्दी ही अपनी फिल्म का काम शुरु होगा। इस बीच शॉर्ट फिल्मों को लेकर मैंने और मेरे भाई नवीन सैनी ने यह काम शुरु किया है। हम दोनों ने सोचा कि जितनी मेहनत हम दूसरों के लिए करते हैं, अगर उतनी खुद के लिए करें तो ज्यादा संतुष्टि मिलेगी। आखिर एक और एक ग्यारह होते हैं। हम दोनों एक फीचर फिल्म प्लान कर रहे हैं। इसके अलावा ४० मिनट की एक शॉर्ट फिल्म पर काम चल रहा है, जो हमारी अभी तक की सबसे बड़ी शॉर्ट फिल्म होगी।

सवाल- आपकी शॉर्ट फिल्मों को कहां देखा जा सकता है।

जवाब- यूट्यूब पर। इसके अलावा हमारी साइट पर भी हमारी शॉर्ट फिल्‍में देखी जा सकती है। लिंक हैं- http://www.youtube.com/user/
nirdeshakashish
http://www.youtube.com/user/f3r2films

http://www.firstframefilmsf3.com

सवाल- चलिए आखिरी सवाल, छोटे शहर से मुंबई आने वाली प्रतिभाओं को क्या सुझाव है?

जवाब- ग्लैमर और स्टारडम को देखकर न आएं और तैयारी करके आएं। अगर अभिनय में हाथ आजमाना चाहते हैं तो ट्रेनिंग लें। हालांकि, एक्टिंग कोई सीखा नहीं सकता, लेकिन आपकी स्किल को निखारा जा सकता है और यह जरुरी है। फिर, मुंबई  में टिकना आसान नहीं है। इसलिए संभव हो तो ऐसी व्यवस्था करके आएं कि अगर पांच छह महीने भटकना पड़े तो भी निराश न हों। यहां सफलता मिलती है...लेकिन टिके रहना जरुरी है।

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