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निर्देशक सिद्धार्थ आनंद इन दिनों अपनी नयी फिल्म अंजाना-अंजानी को लेकर फिर चर्चा में हैं। रणबीर कपूर के साथ उनकी यह दूसरी फिल्म है। रणबीर में अमिताभ सा बनने की संभावना देखते हुए सिद्धार्थ को अब अपनी फिल्म का बेसब्री से इंतजार है। इस फिल्म को लेकर उनसे खास बातचीत।
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कथक का पर्याय हैं बिरजू महाराज। 72 साल की उम्र में भी उनके हौसले जवां हैं। नृत्य उनके लिए साधना है, जिसमें लीन होने के बाद उनके पैरों की थाप से एक नयी दुनिया सजती है। कथक की धारा के साथ बहते-बहते कब वो बृजमोहन नाथ मिश्रा से पंडित बिरजू महाराज हो गये उन्हें खुद भी पता नहीं चला। नई पौध को कथक की बारीकियों से सजाने-संवारने में उन्हें बहुत आनंद आता है। उनसे खास बात की प्रतिभा कटियार ने।
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किसानों की खुदकुशी जैसी गंभीर समस्या पर व्यंग्यात्मक शैली में ‘पीपली लाइव’ बनाकर निर्देशिका अनुषा रिज़वी ने पहली ही फिल्म से अपनी अलग पहचान गढ़ ली है। हालांकि, फिल्म के केंद्र में किसानों की बदहाली है, लेकिन कटाक्ष भारतीय मीडिया की संवेदनहीनता से लेकर राजनीतिक तिकड़मबाजी तक सभी पर है। फिल्म बनाने के अपने पहले अनुभव से लेकर तमाम दूसरे पहलुओं पर अनुषा रिज़वी से खास बात की पीयूष पांडे ने।
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उर्दू व हिंदी की दुनिया को उन्होंने अपनी अनेकों बेहतरीन रचनाओं से नवाजा है। वे जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में उर्दू के प्रोफेसर हैं। उनकी शख्सियत में लेखक के अलावा भी बहुत सारे रंग हैं, जिन्हें कभी वे फोटोग्राफी के शौक में तब्दील करते हैं तो कभी पेंटिंग के। बात असगर वजाहत की हो रही है। इस बहुमुखी और विलक्षण प्रतिभा से हिंदीलोक की खास बातचीत
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वे एक खूबसूरत अदाकारा हैं। लेकिन, उनका दायरा सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं सिमटा हुआ है। वे सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती हैं। संस्कृति को लेकर उनकी अपनी परिभाषा है और इस क्षेत्र में उनकी बात को बेहद संजीदगी से लिया जाता है। फिल्मों के बदलते कलेवर पर तो उनके पास कहने को बहुत असरदायक बाते हैं। जी, बात शबाना आज़मी की हो रही है। जिन्होंने न केवल अभिनय के क्षेत्र में, बल्कि उससे इतर भी अपनी एक खास पहचान बनायी है। शबाना से उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रतिभा कटियार की खास बातचीत-
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आर यू श्योर, कॉन्फिडेंट, लॉक कर दिया जाये। इन तीन जुमलों ने अमिताभ बच्चन और केबीसी को टेलीविजन जगत के सबसे बड़े गेम शो के तौर पर स्थापित कर दिया। हालांकि वे स्वयं इसकी कामयाबी का श्रेय लेने से बच रहे हैं। अमिताभ इस बार केबीसी फोर लेकर आ रहे हैं। अमिताभ ने शो से जुड़े सभी पहलुओं पर दिल खोलकर बात की और बेबाकी से अपनी राय रखी.-
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राजेन्द्र यादव का नाम यूं तो हिंदी साहित्य से जुड़ा है लेकिन हंस में अपने लगभग हर संपादकीय के जरिये उन्होंने जिस तरह पत्रकारिता को आत्मसात् किया वह अन्यत्र कहीं दुर्लभ है। पत्रकारिता में साहित्य की मौजूदगी और वक्त के साथ उसकी बदलती स्थिति पर उन्होंने प्रतिभा के साथ बड़ी बेबाकी से बात की।
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'इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं.' और 'दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए.' जैसे सदाबहार गीतों को लिखने वाले मशहूर शायर और गीतकार अखलाक मोहम्मद खान 'शहरयार' का कहना है कि उनके लिए मौजूदा समय में फिल्मी गीत लिखना मुनासिब नहीं है। उन्होंने कहा कि वह खुद को पेशेवर गीतकार भी नहीं मानते हैं।
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मैं पैदा भले ही मॉरीशस में हुआ, लेकिन मेरा दिल उतना ही हिंदुस्तान में बसता है, जितना कि मॉरीशस में। मुझे इस बात का गर्व है कि मेरी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। भारत में मॉरीशस के राजदूत मुकेश्वर चुन्नी के ये शब्द भारत के प्रति उनके प्यार और उनकी समझ को जताने के लिए पर्याप्त हैं। उन्हें इस बात पर गर्व है कि वे हिंदी बोल सकते हैं। मॉरीशस में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में इन्होंने महती भूमिता निभाई। एक मुलाकात में अपने हिंदी और हिंदुस्तान प्रेम की चर्चा मुकेश्वर कर रहे हैं नीरज सिंह के साथ...
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जब मैं दक्षिणी ध्रुव पर पहुंची तो मुझे हमारी लीडर फेलेस्टी एस्टन के शब्द याद आ रहे थे कि लड़कियां अगर ध्रुवों तक पहुंच सकती हैं तो वे सब कुछ कर सकती हैं। दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला का गौरव हासिल कर रीना कौशल धर्मशक्तू ने अपने लीडर के विश्वास को जीतकर यह साबित कर दिया कि वुमंस ऑन टॉप का जुमला कोरी गप्पबाजी नहीं है। बचपन से ऊंचाई को छूने का जज्बा रखने वाली रीना स्त्री सशक्तीकरण की नई छवि हैं। एक मुलाकात में वह अपने रोमांचक सफर की यादें साझा कर रही हैं नीरज सिंह के साथ
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