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तेलंगाना मुद्दा : कांग्रेस व तेदेपा के सांसद, विधायक सोमवार को देंगे इस्तीफा

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1 जुलाई 2011

हैदराबाद/नई दिल्ली। तेलंगाना मुद्दे को लेकर आंध्र प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। क्षेत्र के कांग्रेस सांसदों और विधायकों ने सोमवार को इस्तीफा देने का निर्णय लिया है जबकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मसले पर जल्दबाजी न करने को कहा है। इस बीच, पार्टी ने कहा कि वह राज्य में किसी संकट का सामना नहीं कर रही है।

राज्य में राजनीतिक माहौल तब गरमा गया जब कांग्रेस के केंद्रीय नेता गुलाम नबी आजाद की हैदराबाद में मौजूदगी के बीच आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व पर राज्य को अविभाजित रखने का दबाव देने का निर्णय लिया।

कांग्रेस सांसदों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल पांच जुलाई को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं अन्य नेताओं से मुलाकात कर उन्हें राज्य को विभाजित न होने देने का अनुरोध करने के लिए दिल्ली रवाना होगा।

तेलंगाना क्षेत्र के अपने समकक्षों के इस्तीफा देने के निर्णय के कुछ घंटों बाद आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं ने शुक्रवार शाम आजाद से मुलाकात की।

इससे पहले दिन में केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने के लिए आंध्र प्रदेश से कांग्रेस के सांसदों, राज्य सरकार के मंत्रियों तथा विधायकों ने सोमवार को इस्तीफा देने का निर्णय लिया। मुख्य विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों ने भी उसी दिन इस्तीफा देने की घोषणा की।

पृथक राज्य के गठन में हो रहे विलम्ब से नाराज आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों ने शुक्रवार को निर्णय लिया कि वे अपना-अपना इस्तीफा सौंप देंगे।

वरिष्ठ नेता के.केशव राव ने संवाददाताओं से कहा कि सांसद अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को सौंपेंगे जबकि राज्य के विधायक विधानसभा अध्यक्ष एन. मनोहर के समक्ष इस्तीफा पेश करेंगे। उन्होंने इस निर्णय को लोगों की जीत बताया।

इस्तीफा देने के निर्णय की घोषणा करते हुए पंचायती राज मंत्री के. जना रेड्डी ने कहा, "हम यहां पद के लिए नहीं, बल्कि तेलंगाना के लोगों के लिए हैं।"

उन्होंने कहा कि मंत्रियों सहित विधानसभा के सभी सदस्य अपना इस्तीफा देने के लिए सोमवार को पूर्वाह्न् 11 बजे विधाानसभा अध्यक्ष से मिलेंगे। विधान परिषद के सदस्य अपने कागजात परिषद अध्यक्ष के. चक्रपाणि के समक्ष पेश करेंगे।

जना रेड्डी ने मांग की कि केंद्र सरकार को उसके द्वारा नौ दिसम्बर 2009 को की गई इस घोषणा से पीछे नहीं हटना चाहिए कि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सामूहिक इस्तीफा देने का निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि लोगों की ओर से उन पर दबाव था कि पृथक राज्य के लिए अपने पद छोड़ दें।

ज्ञात हो कि लोकसभा में कांग्रेस के 12 सांसद तेलंगाना क्षेत्र के हैं। आंध्र प्रदेश से विभिन्न दलों के कुल 42 सांसद हैं जिनमें से 17 तेलंगाना क्षेत्र से हैं।

राज्य विधानसभा के 294 विधायकों में से कांग्रेस के 119 विधायक हैं। इनमें से 50 तेलंगाना क्षेत्र के हैं जिनमें उप मुख्यमंत्री दामोदर राजानरसिम्हा सहित 15 मंत्री हैं।

तेदेपा के दो सांसद और 37 विधायक तेलंगाना क्षेत्र के हैं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों तेदेपा सांसद भी इस्तीफा देंगे या नहीं।

इस बीच, कांग्रेस ने इस बात से इंकार किया कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के समर्थन में पार्टी सांसदों और विधायकों के इस्तीफा देने के फैसले से वह आंध्र प्रदेश में संकट का सामना कर रही है। कहा गया है कि ऐसे हालात से उबरने के लिए पार्टी के पास आंतरिक प्रक्रिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं के लिए तेलंगाना एक भावनात्मक मुद्दा है और पार्टी इसे समझती है।

इस मुद्दे पर उठाए गए सवालों के जवाब में सिंघवी ने कहा, "कोई संकट नहीं है..इन भावनात्मक हालात से उबरने के लिए आंतरिक प्रक्रिया है।"

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