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खुद को संक्रमण से बचाती हैं मधुमक्खियां

bees protect themselves from infection
2 अप्रैल 2012
वाशिंगटन |  जब मधुमक्खियों के समूह में फफूंद संक्रमण होता है तो वे खुद को उससे बचाने के लिए औषधि का इंतजाम स्वयं ही करती हैं। इसके लिए वे फफूंद को दूर करने वाले पौधों के रेजिन का इस्तेमाल करती हैं। एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।
मिनेसोटा विश्वविद्यालय के मार्ला स्पिवैक व नॉर्थ कैरोलिना स्टेट विश्वविद्यालय के माइकल सिमोन-फिंस्टोर्म ने संयुक्त रूप से यह अध्ययन किया। माइकल का कहना है, "मधुमक्खियों की कॉलोनी रेजिन इकट्ठा करने के लिए अपनी कामगार मक्खियों की ऊर्जा व प्रयास बढ़ाने की कोशिश करती है।"

'पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस वन' पत्रिका के मुताबिक फिंसटोर्म का कहना है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मधुमक्खियां अपनी कॉलोनी सुरक्षित रखना चाहती हैं।

फफूंद के संक्रमण की स्थिति में मधुमक्खियां प्रोपोलिस (पौधों में पाए जाने वाले रेजिन व मोम का मिश्रण) से अपना बचाव करती हैं। इसमें फफूंद व बैक्टीरिया संक्रमण से बचाने का गुण होता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक जब संक्रमण का खतरा बढ़ता है तो मधुमक्खियां प्रोपोलिस का संग्रह 45 प्रतिशत तक बढ़ा देती हैं।

इसके साथ ही मधुमक्खियां संक्रमित लार्वा को अपनी कॉलोनी से हटा देती हैं। यदि संक्रमित लार्वा मौजूद रहेंगे तो वहां फफूंद तेजी से विकसित हो सकती है।

प्रोपोलिस एक प्रभावकारी फफूंद विरोधी कारक है। इससे संक्रमण की दर कम हो जाती है।

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