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मीडिया वाले (इलेक्ट्रॅानिक और प्रिंट दोनों) सामान्य तर्क दिया करते हैं कि हम वही दिखाते हैं जो दर्शक देखना चाहते हैं या पढ़ना चाहते हैं यह बिल्कुल बकवास तर्क है. भाई, आप मीडियावाले हैं तो आपसे उम्मीद की जाती है कि आप सामान्यजन से ऊपर हैं. आपकी सोच ऊँची है. समझ अधिक है, परिवार, समाज राष्ट्र, बच्चों स्त्रिायों और निम्न वर्गों की चिंता आपको ज्यादा है. और आप इनकी बेहतरी के लिए सरकार के समक्ष सवाल उठाएँगे, आखिर आप लोकतंत्रा का चैथा स्तम्भ जो हैं. कम अक्ल जनता तो ब्लू फिल्म भी देखना चाहती है तो क्या उसे भी चैनलों पर दिखा देना चाहिए?
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