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फिल्म रिव्यू: शिल्पा शुक्ला की फिल्म बीए पास सी ग्रेड नहीं एक शानदार फिल्म है

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2 Aug, 2013
Mumbai |
इसमें कोई शक नहीं कि बॉलीवुड अब बेहद बोल्ड हो चुका है। फिल्मों के विषय के चुनाव में भी बोल्डनेस साफ़ देखी जा रही है। 'बीए पास' भी कहानी के अनुसार काफी बोल्ड फिल्म है। फिल्म पुरुष वेश्यावृति जैसे सेंसिटिव विषय को सामने लाती है जिसपर बॉलीवुड में शायद ही कोई ए-ग्रेड फिल्म बनी हो। हां महिला वेश्यावृति पर कई फिल्में बन चुकी हैं।

ऐसे में नए निर्देशक अजय बहल की हिम्मत की दाद देनी होगी जिन्होंने इतने संवेदनशील विषय पर फिल्म बनाई जिसपर इंडिया में खुलकर बात करना भी मुनासिब न समझा जाता होगा वैसे मेट्रो सिटीज में अब पुरुष वेश्यावृति का कल्चर धीरे-धीरे आम होने लगा है मगर छोटे शहरों में जहां सेक्स पर भी खुलकर राय व्यक्त नहीं की जा सकती वहां इस विषय पर बात करना तो आप भूल ही जाइए। जहां तक इस फिल्म की बात है तो बीए पास विभिन्न नेशनल और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में कई पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है.

यह एक ऐसे लड़के की कहानी है जो छोटे शहर से पैसा कमाने के लिए दिल्ली आता है। लड़के का नाम मुकेश और उम्र 19 साल है जिसकी भूमिका नए एक्टर शादाब कमाल ने निभाई है। मुकेश तंगहाली से परेशान है, उसके मां-बाप की मौत हो चुकी है और बहनों को अनाथ आश्रम में डाल दिया जाता है ताकि किसी तरह उनकी जिंदगी कट जाए।

पैसे कमाने के लिए मुकेश अपने रिश्तेदार के यहां दिल्ली आ जाता है जो कि पहाड़गंज में रहते हैं। रिश्तेदार के घर में उससे नौकरों की तरह बर्ताव होता है। एक दिन घर में पार्टी के दौरान उसकी मुलाकात एक महिला सारिका से होती है जिसकी भूमिका शिल्पा शुक्ला ने निभाई है। सारिका शादीशुदा है मगर अपनी शादी से संतुष्ट नहीं। ऐसे में एक दिन वह बहाने से मुकेश को घर बुलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती है. इसके बदले में मुकेश को पैसे भी देती है।

पैसों की दिक्कत मुकेश को शुरू से ही रहती है, ऐसे में वह चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाता और ये सब यूं ही चलता रहता है मगर स्थितियां तब बिगड़ जाती हैं जब मुकेश अनजाने में ही  पुरुष वेश्यावृति में फंस जाता है। उसे पता ही चल पाता कि वह एक पुरुष वेश्या बन चुका है। जब उसे इस बात का अंदाजा होता है तो वह इससे निकलने की कोशिशों में लग जाता है और कई अन्य मुश्किलों में पड़ जाता है।

निर्देशन: अजय बहल का निर्देशन बेहतरीन है जिसकी वजह से फिल्म कहीं भी कहानी से भटक नहीं पाती। यह मात्र 95 मिनट की फिल्म है और इस दौरान आपको कहीं भी नहीं लगता कि फिल्म भटक रही है।

एक्टिंग: शादाब कमाल को दाद देनी चाहिए कि उन्होंने पहली फिल्म में ही इतना कमाल का अभिनय किया। वह निश्चित ही बॉलीवुड में लंबी पारी खेलने वाले एक्टर साबित होंगे। उन्हें इस फिल्म के लिए पहले ही ओशियान फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर का सम्मान मिल चुका है। वहीं चक दे इंडिया में शाहरुख़ खान के साथ अभिनय कर चुकी शिल्पा ने भी किरदार को बखूबी जिया है।

कुल मिलाकर देखा जाये तो फिल्म निर्देशन और एक्टर्स की सधी हुई परफॉरमेंस की वजह से अच्छी फिल्म है मगर बेहद बोल्ड विषय और दृश्यों की वजह से आप इसे फैमिली के साथ बैठकर नहीं देख सकते। हमारी तरफ से इसे 2.5 स्टार्स।
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