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खुद को किसी श्रेणी में नहीं बांधना चाहती : तिलोत्तमा

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7 नवंबर 2013
अबु धाबी|
गैर बॉलीवुड अभिनेत्री या विदेशी कलाकार कहलाने वाली अभिनेत्री तिलोत्तमा शोम कहती हैं कि स्थानीय फिल्मों में स्थानीय भूमिकाएं निभाने के लिए भी वह सार्वभौमिक रूप से सोचती हैं और इस काम के लिए वह अपने अवचेतन मन का सहारा लेती हैं।

तिलोत्तमा को अबु धाबी फिल्म महोत्सव (एडीएफएफ) में पंजाबी फिल्म 'किस्सा' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है। उन्होंने आईएएनएस को बताया, "मैं अपनी जिंदगी किसी एक श्रेणी में बंधकर नहीं बिताना चाहती। लोग भले ही मुझे बॉलीवुड से बाहर की अभिनेत्री मानते हों, लेकिन मैं अपने बारे में ऐसा नहीं सोचती।"

उन्होंने कहा, "मुझे इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि मैं बॉलीवुड, अंतर्राष्ट्रीय, विदेशी या कुछ और अभिनेत्री हूं, ये सब तो तमगे हैं। मैं खुद को श्रेणियों में नहीं बांटना चाहती। एक अदाकारा होने के नाते आपकी सोच सार्वभौमिक होती है और आप अभिनय स्थानीय करते हैं।"

तिलोत्तमा 'किस्सा' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतकर काफी खुश हैं। उनका किरदार एक ऐसी युवती का है, जिसकी परवरिश एक लड़के की तरह की गई है। आगे चलकर अपनी पहचान के साथ उसे किस किस पड़ाव पर संघर्ष करने पड़ते हैं, यह फिल्म की कहानी है।

मूल रूप से बांग्ला अभिनेत्री तिलोत्तमा दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की छात्रा रह चुकी हैं। उन्होंने न्यूयार्क विश्वविद्यालय से थियेटर शिक्षा में परास्नातक की डिग्री ली है।

अभिनय के क्षेत्र में शुरू से ही तिलोत्तमा की पसंद कला फिल्में रही हैं, चाहे वह मीरा नायर की 'मानसून वेडिंग' हो, कौशिक मुखर्जी की 'ताशर देश' या दिबाकर बनर्जी की 'शंघाई'। इसके अलावा भी उन्होंने कई लघु फिल्मों में काम किया है।

तिलोत्तमा कहती हैं, "मैं किसी भी फिल्म में काम करूं तो उसमें मेरे लिए एक सवाल होना चाहिए, हर फिल्म से मुझे कुछ नई बात सीखनी होती है। यदि मुझे पहले से ही किसी फिल्म के बारे में सब पता हो तो फिल्म में काम करने का क्या तुक होगा?"

अनूप सिंह के निर्देशन में बनी 'किस्सा' में तिलोत्तमा ने इरफान खान, टिस्का चोपड़ा और रसिका दुग्गल के साथ काम किया है।
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