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'बुलेट राजा' सिनेमा को श्रद्धांजलि है : धूलिया

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12 नवंबर 2013
मुंबई|
फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया कहते हैं कि उनकी आने वाली फिल्म 'बुलेट राजा' 70 के दशक की हिंदी फिल्मों को श्रद्धांजलि है। फिल्म में अभिनेता सैफ अली खान और जिम्मी शेरगिल की जोड़ी और उनके बीच का तालमेल 1975 की सफलतम फिल्म 'शोले' की अमिताभ बच्चन और धर्मेद्र की जोड़ी की याद दिलाता है।

धूलिया ने कहा, "आप सोच रहे होंगे कि फिल्म में सैफ का काम खूनखराबा और गोलियां बरसाना है, लेकिन 'बुलेट राजा' में वह घोर विचारक हैं। मेरी फिल्म उन आदर्श नायकों की याद दिलाती है, जैसे सत्तर के दशक में अमिताभ और धर्मेद्र हुआ करते थे।"

'बुलेट राजा' वैसे तो समकालीन परिदृश्य में उत्तर भारत के किसी छोटे शहर की कहानी लगती है, लेकिन धूलिया का फिल्म के बारे में कुछ और ही कहना है।

उन्होंने कहा, "मेरे फिल्म का नायक सैफ और उनके दोस्त जिम्मी का किरदार 'शोले' की धर्मेद्र और अमिताभ की जोड़ी से प्रेरित है। मैं बेहद उत्साहित हूं क्योंकि इससे पहले मैंने इस तरह की फिल्म नहीं बनाई है।"

धूलिया राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता रहे हैं। उनकी फिल्म 'बुलेट राजा' उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित स्थानीय माफिया गिरोहों की कहानी है।

उन्होंने कहा, "मेरी फिल्में वास्तविकता पर आधारित होती हैं। 'बुलेट राजा' में भी मार धाड़ के दृश्य भले ही 'राउडी राठौर' की तरह काल्पनिक और निर्देशित हैं, लेकिन फिल्म की कहानी काल्पनिक और गढ़ी हुई नहीं है।"

फिल्म में काफी सारे गाने भी हैं, जिनके बारे में धूलिया का कहना है, "मैं मानता हूं कि मैंने बहुत ज्यादा नृत्य-संगीत फिल्म में डाला है, लेकिन कोई भी गीत या नृत्य बिना कारण नहीं ठूंसा गया है।"

उन्होंने कहा, "बुलेट राजा' सिर्फ अच्छे समय और अच्छे अनुभवों की कहानी नहीं है। फिल्म कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करती है-युवा शक्ति का शोषण और राजनीति फिल्म का महत्वपूर्ण मुद्दा है।"
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