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श्रीमती प्रतिभा पाटिल-ज्योतिषीय विश्‍लेषण

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भारतीय संसद की 12वी तथा प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल का जन्म महाराष्ट्र के जलगांव जिले के नदगांव मे 19 दिसम्बर 1934 में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा जलगांव के आर.आर. विद्यालय में हुई थी, बाद में आपने जलगांव कालेज से इकॉनोमिक्स एवं राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। भारतीय लोकतन्त्र के सर्वोच्च पद पर पहुंचने का गौरव आपको हासिल हुआ। आज हम इनकी कुन्डली का सम्यक अध्ययन करके यह जानने की कोशिश करेंगे कि ज्योतिष में वह कौन-कौन से राजयोग हैं, जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण राजयोग का फल भोगता है। भारत के सर्वोच्च सम्माननीय पद पर आसीन होने के लिये कौन से योग होते हैं।

श्रीमती पाटिल का आगे का समय कैसा है? आइये हम इनकी कुन्डली का ज्योतिषीय विश्लेषण करते है।

इनका जन्म मीन लग्न में हुआ था, लग्नेश गुरू अष्ट्म भाव में गया है, परन्तु गुरू नवमांश कुन्डली मे पंचम में स्थित होकर सभी दोषों को नष्ट कर रहा है। नवमांश कुन्डली में दशम भाव का राहु एक सफल राजनीतिज्ञ बनाता है। पंचम भाव का गुरू जातिका को तेज बुद्धिवाली, समझदार एवं उच्च शिक्षा प्रदान करता है, जैसा कि राष्ट्रुपति श्रीमती प्रतिभापाटिल जी की कुन्डली से यथार्थ है। बुध की नवम भाव में स्थिति जातिका को वकालत की तरफ भी प्रेरित करती है, जिसके कारण श्रीमती प्रतिभा जी ने  वकालत की डिग्री हासिल की तथा अपने कॅरियर की शुरूआत भी जलगांव जिले के न्यायालय मे बतौर वकील के रूप में की। आपकी कुन्डली में चन्द्रमा उच्च राशि में तृतीय स्थान में स्थित है, जिसके कारण आप एक साहसी महिला है, जो अपने लक्ष्य को बिना हासिल किये चुप नहीं बैठ सकती। आपका खेल कूदों के प्रति भी रुझान है।

वर्तमान में आपकी कुन्डली के अनुसार बुध ग्रह की महादशा चल रही है, जोकि सन् 2000 में शुरू हुई थी एवं सन् 2017 तक जारी रहेगी, क्योंकि बुध इनकी कुन्डली में नवम भाव मे स्थित है और नवमांश कुन्डली मे भी बुध मित्र क्षेत्री है। अतः इनकी बुध महादशा का समय उल्लेखनीय है, सन् 2007 मे सुर्य की अन्तर्दशा मे भारत गणराज्य की प्रथम महिला राष्ट्र्पति के रूप मे शपथ ग्रहण करके गौरव प्राप्त किया। इस समय राहु का अन्तर चल रहा है। राहु जन्म कुन्डली के 11वें भाव में बैठा है। वैसे तो 11वें भाव का राहु अच्छा परिणाम दिलाता है, परन्तु राहु का वर्तमान में 10वें भाव से गोचर ठीक नहीं होता है। अतः आपको अपने बचे हुये राष्ट्रपति कार्यकाल में कुछ विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। राहु के अन्तर में इनका बचा हुआ कार्यकाल चुनौतियो से भरा होने के कारण महत्वपूर्ण हो सकता है। आने वाले दो वर्षो में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही इस वर्ष अप्रैल से अगस्त के मध्य आपका कोई विशेष निर्णय आपको ख्याति दिला सकता है। भारतीय राजनीति इस समय एक बुरे दौर से गुजर रही है, जनता का विश्वास सरकार के ऊपर से उठता ही जा रहा है, ऐसे समय में राष्ट्रपति की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है। आपकी कोई टिप्पणी या अभिभाषण जनता में राष्ट्रपति पद की गरिमा का एहसास करायेगा। 

अक्तूबर से नवम्ब्र के मध्य स्वास्थ्य नरम रह सकता है। अतः सावधानी बरतनी चाहिये। चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में अप्रेल 2012 से जुलाई 2012 के मध्य कोई विशेष सम्माननीय पुरुस्कार मिल सकता है। आपका राष्ट्रपति का कार्यकाल शान्तिपूर्ण व्यतीत होगा। जुलाई 2012 मे मंगल का प्रत्यंतर चलेगा, इसके कारण द्वितीय कार्यकाल मिलने की सम्भावना असम्भव ही नजर आती है। उपर्युक्त सभी सम्भावनायें ग्रहो के गोचर तथा दशा-महादशाओं के आधार पर नजर आती है। बाकी सब हरि इच्छा पर निर्भर है।

जय श्री कृष्ण, जय श्री राधे !

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