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'सिलोन' में पीछे छूटा फिल्मांकन का व्याकरण

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11 नवंबर 2013
चेन्नई|
तमिल फिल्म 'सिलोन' के एडिटर टी.एस. सुरेश कहते हैं कि इस फिल्म में आकर्षक दृश्य रखने की बजाय निर्देशक संतोष सिवन ने फिल्मांकन के व्याकरण को तोड़ा है। सुरेश कहते हैं कि यह बहुत कुछ सिखाने वाला अनुभव था।

'सिलोन' श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान एक बेघर शरणार्थी लड़की की कहानी है।

सुरेश ने आईएएनएस को बताया, "मैंने बहुत से ऐसे निर्देशकों के साथ काम किया है कि जो फिल्म की अंतिम एडिटिंग के समय हमेशा मुझसे फिल्म में खूबसूरत दृश्य शामिल करने के लिए कहते हैं। लेकिन संतोष सर ने मुझसे सभी अच्छे दृश्य एक तरफ रख देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फिल्म खूबसूरत नहीं दिखनी चाहिए। यह गूढ़ और साधारण लगनी चाहिए।"

इन फिल्म दृश्यों की व्यवस्था करने की चुनौती पाने वाले सुरेश ने कहा, "वह अधिकांश दृश्य ऐसे चाहते थे जैसे कि वह मोबाइल फोन या हाथ में थामे छोटे से कैमरे से लिए गए हों। आमतौर पर फिल्मों में आपको ऊपर और नजदीक से कैमरे से लिए गए दृश्य दिखते हैं, लेकिन 'सिलोन' में ये नहीं मिलेंगे।"

'तमीझ पदम', 'ठूंगा नगरम', 'तेज' सरीखी फिल्मों का संपादन कर चुके सुरेश चलचित्रकार से फिल्मकार बने सिवन के साथ काम करने को गौरव की बात मानते हैं।

बतौर फिल्मकार संतोष सिवन 'हेलो', 'टेररिस्ट', 'मल्ली' और 'नवरस' सरीखी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्में बना चुके हैं।

सुरेश बहुत से नए फिल्मकारों संग काम कर चुके हैं लेकिन वह कहते हैं कि सिवन ने ज्यादा छूट दी।

उन्होंने कहा, "सौभाग्य से काम करने के दौरान संतोष सर के साथ कोई समझौता नहीं करना पड़ा।"

उन्होंने कहा, "वह काम के लिए दबाव डालने की बजाय उस पर विश्वास दिलाने वाले शख्स हैं।"
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