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सेना प्रमुख के भविष्य पर बंटे राजनीतिक दल

political parties divided over the future of prime minister

28 मार्च 2012

नई दिल्ली | सेना प्रमुख के भविष्य को लेकर बुधवार को राजनीतिक दल एकमत नहीं हो पाए। समाजवादी पार्टी (सपा) और जनता दल (युनाइटेड) ने जहां सेना प्रमुख को बर्खास्त किए जाने की मांग की, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि वह इस मांग का समर्थन नहीं करेगी।

सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र को लेकर राज्यसभा में हुए हंगामे के बीच जद (यू) के नेता शिवानंद तिवारी ने सेना प्रमुख की बर्खास्तगी की मांग सबसे पहले की।

तिवारी ने कहा, "यह अनुशासनहीनता का एक गम्भीर मामला है, सेना प्रमुख को बर्खास्त किया जाना चाहिए.. यदि हम कार्रवाई नहीं करते हैं, तो यह एक बुरी परम्परा बन सकती है।"

तिवारी के सुर में सुर मिलाते हुए सपा नेता रामगोपाल यादव ने संसद से बाहर संवाददाताओं से कहा कि जवाबदेही तय की जानी चाहिए और कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि जनरल सिंह जिम्मेदार हैं तो उन्हें बर्खास्त कर जेल भेजा जाना चाहिए।

उधर विपक्षी भाजपा ने इस मुद्दे पर अलग राय जाहिर की। जद (यू) के रुख के बारे में पूछे जाने पर भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "हम इस विचार से इत्तेफाक नहीं रखते।"

वामपंथी नेताओं ने गहन जांच की मांग की और कहा कि दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। बीजू जनता दल (बीजद) ने वामपंथी नेताओं के विचार से सहमति जताई।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, "लीक की जांच की जाए, जवाबदेही तय की जाए और जिम्मेदार व्यक्ति को दंडित किया जाए।"

ज्ञात हो कि जनरल वी.के. सिंह ने मनमोहन सिंह को लिखे एक पत्र में सेना के पास हथियारों व गोला-बारूद की कमी का जिक्र किया था और यह प्रश्न खड़ा किया था कि क्या ऐसी स्थिति में देश कोई युद्ध लड़ सकता है।

रपटों के अनुसार, 12 मार्च, 2012 को लिखे पत्र में कहा गया है कि देश में सेना के टैंकों के लिए विस्फोटक नहीं हैं। पत्र में साजोसामान के अभाव को दूर कर सेना को आक्रामक स्तर पर लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

 

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