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मॉल्स में फिल्मों का प्रचार जरूरी नहीं : परेश रावल

paresh rawal said he dont like to visit malls for films pramotion

25 सितम्बर 2012


मुम्बई। अभिनेता परेश रावल अपनी फिल्मों के लिए असरदार प्रचार चाहते हैं लेकिन उन्हें अधिक प्रचार की जरूरत महसूस नहीं होती। वह मानते हैं कि किसी मॉल में जाकर फिल्म का प्रचार करना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह सफल ही होगी। परेश की फिल्म 'ओह माय गॉड' इसी सप्ताह प्रदर्शित होगी।


परेश ने कहा, "प्रचार जरूरी है और यह करना पड़ता है। मैं प्रचार करने से शर्माता नहीं हूं लेकिन मुझे लगता है कि इसके लिए अलग-अलग शहरों और मॉल्स में जाना व किसी बेवकूफ लड़के की तरह अपने हाथ उठाकर प्रचार करना जरूरी नहीं है।" उन्होंने कहा, "जरूरी नहीं है कि वहां मौजूद भीड़ बॉक्सऑफिस पर आपकी फिल्म को सफल बनाए। इसकी अपेक्षा प्रचार के लिए टीवी या प्रिंट मीडिया (साक्षात्कार के जरिए) में जाना ज्यादा बेहतर है।"


बासठ वर्षीय परेश इन दिनों 'ओह माय गॉड' के प्रचार में व्यस्त हैं, जो गुजराती नाटक 'कांजी विरुद्ध कांजी' पर आधारित है। फिल्म में उन्होंने एक नास्तिक की भूमिका निभाई है।


उमेश शुक्ला के निर्देशन में बनी यह फिल्म 28 सितम्बर को प्रदर्शित होगी। फिल्म में अक्षय कुमार ने भी छोटी सी भूमिका निभाई है।


परेश के लिए 'ओह माय गॉड', 'कांजी विरुद्ध कांजी' की वैकल्पिक व्याख्या उपलब्ध कराने का एक स्वर्णिम अवसर है।


उन्होंने कहा, "नाटक शब्दों का माध्यम है और फिल्म तस्वीरों का माध्यम है। इसलिए इसे पटकथा में बदलते समय आपको बाहर जाकर शूटिंग के लिए कई जगहें देखनी पड़ीं। यह

एक नाटक को अलग व्याख्या व नया अर्थ देने का स्वर्णिम अवसर था।"


फिल्म में अक्षय ने भगवान कृष्ण की भूमिका निभाई है।


उन्होंने कहा, "उनकी आंखों में किसी तरह की चमक है। वह अच्छे दिखते हैं। बीते सालों के दौरान उनमें कुछ परिपक्वता आई है। इसलिए हमने उनका चयन किया।"

परेश ने 'डीयर फादर', 'वैरी' और 'महारथी' जैसे कई गुजराती नाटकों में अभिनय किया है।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि रंगमंच की पृष्ठभूमि होना बहुत महत्वपूर्ण है। एक फिल्म अभिनेता के लिए यह बहुत आवश्यक व महत्वपूर्ण है।"

परेश ने 'हेरा फेरी', 'गरम मसाला', 'तमन्ना' और 'सरदार' जैसी फिल्मों में अभिनय किया है।

 

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