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बाल विवाह के खिलाफ एक कदम

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20 अप्रैल 2011

भोपाल। कलर्स पर प्रसारित सीरियल बालिका वधु जब शुरू हुआ था तब से लेकर आज तक इस सीरियल को लोगों ने बहुत पसंद किया है। इसका एक कारण यह था कि उस दौर में सास-बहु वाले कार्यक्रमों से हटकर सामाजिक सरोकार वाला यह शायद पहला सीरीयल था। इस सीरीयल की मुख्‍य किरदार आनंदी ना चाहते हुए भी माता-पिता और समाज के दबाव में आकर बाल विवाह की शिकार हो जाती है।
 
बाल-विवाह की शिकार आनंदी बड़ी होकर अपने आस-पास होने वाले बाल विवाहों को रोकने का प्रयत्‍न करती है और इसमें कामयाब भी होती है। कुछ ऐसा ही असल जिंदगी की पूनम के साथ भी हुआ।

भोपाल की पूनम जब महज 16 वर्ष की थी तभी उसके परिजन उसकी शादी कर देना चाहते थे, मगर वह विवाह के लिए तैयार नहीं थी। पूनम जानती थी कि कच्ची उम्र में होने वाले विवाह से अनेक समस्याएं होती हैं। उसने इस विवाह के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आखिर में उसे जीत मिल ही गई।

अब यही पूनम किशोरियों को विवाह की उम्र के सम्बंध में जागृत करने में लगी है। उसकी कोशिश है कि किशोरावस्था में किसी का विवाह न हो।

पूनम बताती है कि लगभग दो साल पहले जब एक दिन वह स्कूल से लौटी तो घर का नजारा बदला-बदला सा था। उसे छोटी बहन ने बताया कि उसकी शादी की तैयारियां चल रही हैं। पूनम का सवाल था कि वह तो अभी 16 वर्ष की है और पढ़ाई करना चाहती है फिर उसे विवाह के बंधन में क्यों बांधा जा रहा है?

पूनम ने अपने माता-पिता के सामने अपनी बात उठाई लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। फिर उसने अपनी बुआ की मदद लेनी चाही लेकिन बात न बनी। तब इस स्थिति में उसने अपने पिता को धमकी दी कि अगर उसकी शादी नहीं रोकी गई तो वह पुलिस का सहारा लेगी। पूनम की यह धमकी काम आई और उसके अभिभावक शादी न करने के लिए राजी हो गए।

पूनम की शादी राजस्थान के एक अधेड़ उम्र के आदमी से की जा रही थी। उस आदमी की उम्र पूनम की उम्र की दोगुनी से भी ज्यादा, 40 साल थी। पूनम अपने भविष्य को लेकर चिंतित थी व सम्भावित समस्याओं से भी वाकिफ थी इसीलिए उसने शादी का विरोध किया।

बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ व 'चाइल्ड राइट ऑब्जरवेटरी' द्वारा 'बाल विवाह' विषय पर आयोजित कार्यशाला में पूनम ने अपने संघर्ष की गाथा सुनाई। उसने बताया कि अब वह 'सरोकार' नामक संस्था से जुड़कर किशोरियों को जागृत करने में लगी है। साथ ही किशोरियों और उनके पालकों को बाल विवाह के दुष्प्रभाव बता रही है।

इस कार्यशाला में एक अन्य किशोरी पूजा ने भी अपने अनुभव सुनाए और बताया कि वह बाल विवाह के नुकसान से भलीभांति वाकिफ है क्योंकि उसकी मां की किशोरावस्था में शादी हो गई थी। इसके चलते मां को कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है। वह चाहती है कि किशोरावस्था में बालिकाओं का विवाह न किया जाए। उसका कहना है कि बाल विवाह किशोरी के जीने के अधिकार, शिक्षा व अभिव्यक्ति के अधिकार छीन लेता है।

पूनम व पूजा के साथ और भी बालिकाएं है जो बाल विवाह के नुकसान को जानती हैं, साथ ही वे हमउम्र किशोरियों से लेकर उनके पालकों तक को इस कुरीति से दूर रहने का संदेश दे रही हैं।

 

 

 

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