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एक और 'इंशाअल्लाह, फुटबॉल' नहीं बना सकता : जावेद

javed on movies

4 मई 2012

नई दिल्ली। अभिनेता, नर्तक व निर्माता जावेद जाफरी के निर्माण में बनी 'इंशाअल्लाह, फुटबॉल' को सामाजिक मुद्दों पर बनी इस साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। वैसे जावेद कहते हैं कि वह ऐसी फिल्में और नहीं बना सकते क्योंकि अर्थपूर्ण सिनेमा को पर्याप्त दर्शक नहीं मिल पाते हैं।
 
एक और फीचर फिल्म 'बीएमडब्ल्यू' पर काम पूरा कर चुके जावेद ने आईएएनएस से साक्षात्कार में कहा, "मैं 'इंशाअल्लाह, फुटबॉल' जैसी और फिल्म बनाने का जोखिम नहीं उठा सकता क्योंकि इस फिल्म की बॉक्सऑफिस पर सफलता उसकी रचनात्मक संतुष्टी के समान नहीं है।"

'इंशाअल्लाह, फुटबॉल' का निर्देशन फैशन डिजाइनर ऋतु कुमार के बेटे अश्विन कुमार ने किया है।

जावेद ने कहा, "हमारे बीच रचनात्मक मतभेद थे लेकिन हमने उन्हें सुलझा लिया था। यह पूरी तरह से अश्विन की फिल्म है लेकिन यह पुरस्कार मिलना बहुत बड़ी बात है।"

उन्होंने कहा, "मैंने 'इंशाअल्लाह, फुटबॉल' का निर्माण किया है। 'द फॉरेस्ट' बनाने के बाद अश्विन ने मुझसे कहा कि वह खुद किसी फिल्म पर काम कर रहे हैं। मैं जानना चाहता था कि वह क्या कर रहे हैं। उन्होंने मुझे इस अर्जेटिनाई-ब्राजीलियाई जोड़े के बारे में बताया, जो कश्मीर में बच्चों को फुटबॉल सिखा रहे थे और युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को खेलने के लिए दक्षिण अमेरिका भेज रहे थे। मुझे कहानी पसंद आई और मैंने उनसे कहा कि मैं इसका निर्माण करूंगा।"

'इंशाअल्लाह, फुटबॉल' की कहानी कश्मीर में संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है। इसे पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादी बशीर बाबा के बेटे बशरत बाबा के जरिए पेश किया गया है। बशरत को फुटबॉल खेलने का जुनून है। उसे ब्राजील जाने के लिए चुना जाता है लेकिन भारत सरकार उसे पासपोर्ट देने से मना कर देती है।

जावेद ने 'बीएमडब्ल्यू' का निर्माण भी पूरा कर लिया है। इसमें खुद जावेद, तनिष्ठा चटर्जी, सरिता चौधरी, चंदन डे सान्याल, अदिल हसन व विजय राज ने अभिनय किया है।


 

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