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भारत और चीन दुनिया की नई प्रौद्योगिकी शक्ति

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16 अप्रैल 2011

वाशिंगटन। भारत और चीन तेजी के साथ नई प्रौद्योगिकी शक्ति के रूप में उभर रहे हैं और दोनों देश आने वाले 10 वर्षो में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक वृद्धि दर्ज करा सकते हैं। यह जानकारी एक नई रपट में सामने आई है।

'फोर्ब्स' पत्रिका ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा हाल ही में जारी की गई एक 'वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी रपट' के हवाले से कहा है कि यद्यपि इन उभर रहे बाजारों व विकसित राष्ट्रों के बीच बड़ा फासदा अभी भी बरकरार है, लेकिन यह दूरी अगले दशक में काफी कम हो जाएगी।
 
मोबाइल फोन, इंटरनेट, पर्सनल कंप्यूटर के साथ ही नियाम वातावरण एवं आईटी अधोसंरचना के व्यापक इस्तेमाल के आधार पर पहचाने व चिन्हित किए गए 138 देशों में से चीन का स्थान 36वां और भारत का स्थान 48वां है।

उच्च अंक पाने वाले अन्य एशियाई देशों में सिंगापुर दूसरे स्थान पर जबकि ताइवान छठे स्थान पर, कोरिया 10वें स्थान पर और हांगकांग 12वें स्थान पर है। फोर्ब्स ने डॉव जोंस वेंचर सोर्स के हवाले से कहा है कि पिछले वर्ष वैश्विक स्तर पर नई एवं उभर रही कम्पनियों में हुए 37.7 अरब डॉलर के शुरुआती पूंजी निवेश का 13 प्रतिशत हिस्सा भारत और चीन का था।

चीन का निवेश 59 प्रतिशत वृद्धि के साथ चार अरब डॉलर हो गया, जबकि भारत का निवेश 14 प्रतिशत वृद्धि के साथ 89.50 करोड़ डॉलर हो गया। दोनों की वृद्धि का यह प्रतिशत अमेरिका की 11 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है। अमेरिकी निवेश इस वृद्धि के साथ 26.2 अरब डॉलर रहा था।
 
फोर्ब्स ने प्रारम्भिक सार्वजनिक प्रस्तावों के रुझानों का विश्लेषण करते हुए कहा है कि पिछले वर्ष अमेरिका में सूचीबद्ध हुईं उद्यम समर्थित 61 कम्पनियों में से 22 कम्पनियां चीन की थी। भारत भी ऑनलाइन नवोदित ट्रैवेल कम्पनी, मेकमाइट्रिप के नैसडैक में सूचीबद्ध होने के साथ आईपीओ के नक्शे पर आ गया है।
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