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5 दिनों तक मनाये जाने वाले उत्सवों का नाम है दीपावली

diwali 2011 celebrations
24  अक्टूबर 2011

राम हरि शर्मा
हमारी सनातन संस्कृति में व्रत ,त्योहार और पर्व अपना विशेष स्थान रखते है सनातन धर्म में पर्व और त्योहारों का इतना बाहुल्य है कि यहां के लोगों में एक कहावत ही प्रचलित हो गई है कि  "सात वार नौ त्योहार"।

पितृ पक्ष के बाद नवरात्र ,फिर दुर्गानवमी उसके बाद दशहरा मनाते ही आ जाती है दीवाली। दीवाली का नाम सुनते ही मन की आखों के सामने रोशनी का चक्र सा जगमगाने लगता है चारो तरफ़ रोशनी की कतारें मन को लुभाने लगती है।

दीपावली का अर्थ है दीपों  की पंक्ति। दीपावली शब्द ‘दीप’ एवं ‘आवली’ की संधि से बना है। आवली अर्थात पंक्ति, इस प्रकार दीपावली शब्द का अर्थ है, दीपों की पंक्ति । भारत वर्ष में मनाए जानेवाले सभी त्यौहारों में दीपावलीका सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है।
 
दीवाली खुशियों का त्योहार है। हिन्दू मान्यता के अनुसार। दीवाली कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। वैसे यह त्योहार धन तेरस से शुरू होकर भैया दूज तक लगातार चलता है। इन पांचों दिनो मे नये वस्त्र पहनना, मिठाइया खाना खिलाना, गोवर्धन पूजा करना, भाई बहनों द्वारा परस्पर प्रेम और जिम्मेदारियों का निर्वाहन , ऐसे  5 दिनों तक मनाये जाने वाले उत्सवों का नाम है  दीपावली पर्व।

माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात रावण का संहार करके माता जानकी जी और भ्राता लक्षमण के साथ लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। उसी सन्दर्भ में श्री रामचन्द्र जी के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए थे । कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं।
 
एक दूसरी मान्यता के अनुसार-  जब बामन भगवान ने राज बलि से तीन पग भूमि मागी थी और बामन भग्वान ने दो पग मे ही तीनो लोकों को नाप लिय था तब राज बलि ने तीसरा पग मे अपना शरीर अर्पण किया था। इससे प्रसन्न होकर वामन भगवान ने राजा बलि को यह बरदान दिया था कि ” तीन पग पॄथ्वी देने के संकल्प से तीनों लोक दे डालने वाले बलि! तुम्हारी याद मे लोग तीन दिनों तक दीपक जलाकर उत्सव मनायेगे, इसलिये ऐसी मान्यता है कि धनतेरस, काली चौदस या रूप चतुर्दसी और दीवाली ये उत्सव राजा बलि के सम्मान मे भगवान ने प्रकट करवाये है। काली चौदस को छोटी दिवाली भी कहते हैं,यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्तूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। इसे दीवाली या दीपावली भी कहते हैं। दीवाली अँधेरे से रोशनी में जाने का प्रतीक है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है।

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