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'विक्की डोनर' और 'कहानी' जैसी फिल्मों की जरूरत है : धूलिया

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8 फरवरी 2013

मुम्बई। बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक तिग्मांशु धूलिया कहते हैं कि 'विक्की डोनर' और 'कहानी' जैसी फिल्मों का बनना सिनेमा जगत के लिए अच्छी बात है। लेकिन इस तरह की सफल फिल्में बहुत कम बनती हैं और एक या दो फिल्में सिनेमा जगत की अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए नाकाफी हैं। फिल्म जगत के लिए बदलाव अब भी काफी दूर है। 

धूलिया ने आईएएनएस को बताया, "सिनेमा जगत के लिए यह एक अच्छा समय है। लेकिन इन दो फिल्मों की तरह कितनी फिल्में बनती हैं। सिनेमा जगत में बदलाव तब तक नहीं हो सकता जब तक अच्छी फिल्मों का अनुपात इतना कम होगा।"

धूलिया के अनुसार, सिनेमा के साथ प्रयोग किए जा सकते हैं लेकिन यह कविता लिखने जैसा नहीं है इसमें पैसा भी लगता है। कलाकारों की साख का भी सवाल होता है।

फिल्म निर्माण कला का बहुत ही कठिन रूप है जिसमें आप अपनी बात कहना चाहते हैं लेकिन आपको अर्थव्यव्स्था का भी ध्यान रखना पड़ता है।

मैं बहुत उदार फिल्में बनाता हूं। मेरी फिल्में दर्शकों की समझ से बाहर की नहीं होतीं। धूलिया कहते हैं हमें फिल्मों में तकनीकों का प्रयोग करना चाहिए और अनावश्यक खर्चे से बचना चाहिए।

उनकी शुरुआती फिल्में 'हासिल', 'चरस', 'शार्गिद' बहुत सफल नहीं हो पाईं लेकिन फिल्म 'पान सिंह तोमर' ने पिछली सारी कसर पूरी कर दी। उनकी फिल्में 'साहब बीवी और गुलाम' और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में उनका अभिनय दर्शकों को उनका कायल कर गया।

धूलिया मुस्कराते हुए कहते हैं, "हर किसी का समय आता है और यह मेरा समय है। मैं आगे भी ऐसी फिल्में बनाता रहूंगा। पिछले सात सालों में मेरी कोई फिल्म प्रदर्शित नहीं हुई। मैं इस दौरान फिल्म की कहानियां लिखने में व्यस्त रहा। अब पटकथाएं पूरी हो चुकी हैं और मैं उन फिल्मों का निर्देशन शुरू करना चाहता हूं।"

धूलिया फिलहाल अपनी नई फिल्म 'बुलेट राजा' के सिलसिले में व्यस्त हैं। फिल्म में सैफ अली खान ने मुख्य किरदार निभाया है। वह कहते हैं, "यदि कलाकार मेरी फिल्में करना चाहते हैं तो अच्छी बात है मैं फिल्में उसी तरीके से बनाता रहूंगा जैसी अब तक बनाता आया हूं।"
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