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नीरज ग्रोवर हत्याकांड : सबूत मिटाने की दोषी मारिया

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30 जून 2011

मुम्बई।  मुम्बई की एक अदालत ने गुरुवार को वर्ष 2008 में हुए नीरज ग्रोवर हत्याकांड में नौसेना के पूर्व अधिकारी जेरोम मैथ्यू को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया है जबकि उसकी महिला मित्र मारिया सुसायराज को सबूतों को नष्ट करने पर दोषी करार दिया है।

सत्र न्यायाधीश एम. डब्ल्यू. चंद्वानी ने मैथ्यू को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए अपने फैसले में कहा कि अपराध हत्या करने के बराबर नहीं है। वह शुक्रवार को सजा सुनाएंगे।

मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मारिया के वकील और अभियोजन पक्ष ने कहा कि वे फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे। मैथ्यू के वकील अब्दुल वहाब खान ने कहा कि उनके मुवक्किल को सजा मिलने के बाद वह इस मसले पर फैसला करेंगे।

ज्ञात हो कि गैर इरादतन हत्या के एक दोषी को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

मारिया के वकील शरीफ शेख ने कहा कि वह अदालत के फैसले को चुनौती देंगे। अदालत ने मारिया को साक्ष्यों को नष्ट करने पर दोषी ठहराया है।

वहीं, अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रोवर के माता-पिता अमरनाथ एवं नीलम ग्रोवर ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में कहा कि वे 'फैसले से निराश हैं'। वे आरोपियों को मौत की सजा दिए जाने की उम्मीद कर रहे थे।

न्यायाधीश चंद्वानी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मैथ्यू ने आवेश में आकर अपराध किया। ग्रोवर की हत्या सोच-विचारकर नहीं की गई।

मारिया के वकील शेख ने पत्रकारों से कहा कि चूंकि उसे अधिकतम तीन वर्षो की सजा हो सकती है और वह इतना समय पहले ही सुनवाई के दौरान जेल में बिता चुकी है। इसलिए उसे शुक्रवार को जमानत पर छोड़ देना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि एक निजी टेलीविजन कम्पनी में निर्माता के रूप में काम करने वाले नीरज ग्रोवर की हत्या सात मई 2008 को हुई थी। उसका शव मलाड स्थित मारिया के फ्लैट में निर्वस्त्र मिला था।

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