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कितनी सफल होगी श्रीदेवी की इंग्लिश-विंग्लिश ?

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हिन्दी सिनेमा जगत की अगर सबसे चुलबुली अभिनेत्री का खिताब दिया जाए तो श्रीदेवी इस खिताब की सबसे प्रबल दावेदार होंगी।  अपने अभिनय से श्रीदेवी ने भारतीय सिनेमा जगत में अभिनेत्री की छवि को भी चुलबुला बना दिया। यदि ज्योतिष के नजरिए से बात की जाय तो चंद्रमा को सबसे ज्यादा चंचल ग्रह कहा गया है। सभी जानते हैं कि चन्द्रमा प्रतिदिन अपनी आकृति बदलने वाला ग्रह है। जब चंद्रमा का स्वरूप स्थिर नहीं होता तो स्वाभाविक है कि जिस जातक या जातिका पर इस ग्रह का सर्वाधिक असर होगा वह कितना चंचल और चुलबुला होगा। यही कारण रहा कि श्रीदेवी का चुलबुलापन जगजाहिर हुआ।

श्रीदेवी का जन्म कर्क लग्न और वृश्चिक नवांश में हुआ। जन्म लग्न का स्वामी चंद्रमा है जो उच्च राशि में होकर लाभ भाव में स्थित है। यह लग्नेश और चंद्रमा दोनो के लिए ही अच्छी स्थिति है। लग्न भाव का स्वामी लाभ भाव में है और लाभ भाव का स्वामी लग्न भाव में है। जो बडी सफलता का संकेतक है। क्योंकि यह सम्बंध सृजनात्मक क्षमता के कारक ग्रह चंद्रमा और कला के कारक ग्रह शुक्र के मध्य बन रहा तो निश्चय ही ऐसी जातिका को उच्च स्तर की अदाकारा होना चाहिए। इनका जन्म नक्षत्र है "कृतिका" जो सूर्य का नक्षत्र है। कहा गया है कि कृतिका नक्षत्र में जन्म होने से जातक या जातिका विख्यात,उच्चाधिकार युक्त,विलास प्रेमी, प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी, रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रहने वाला, कला एवं कलात्मक विज्ञानों एवं कार्य व्यवसायों से संबंद्ध अभिनय एवं नाट्य क्षेत्र, आधुनिक दूरदर्शन एवं राजनीति के क्षेत्र में से इनका उदय होता है। अत: लग्न पर शुक्र की स्थिति, लग्नेश का शुक्र की राशि में होना, कर्मेश और पंचमेश का चंद्रमा के नक्षत्र में होना। कला के भाव पर चंद्रमा की दृष्टि आदि तमाम ग्रहीय स्थितियों ने इन्हें फ़िल्मों में एक बडी अदाकारा बनाया। इन तमाम ग्रहीय स्थितियों  को संक्षेप में कहा जाय तो चंद्रमा और शुक्र ने श्रीदेवी को बडी फ़िल्म स्टार बनाया।

श्रीदेवी की उम्र दो साल भी नहीं हुई थी कि इन पर चंद्रमा की दशा का प्रभाव शुरू हो गया। और चार साल की उम्र से ही इन्होंने अभिनय की शुरुआत कर दी। उस समय दशाएं थीं, चंद्रमा में राहू की। यद्यपि चंद्रमा में राहू की दशा को अच्छा नहीं कहा गया है लेकिन श्रीदेवी की कुण्डली में राहू भाग्येश बृहस्पति के नक्षत्र और कला के कारक शुक्र के उपनक्षत्र में स्थित है अत: यह अभिनय के मामले में श्रीदेवी को बडी उंचाइयां देने वाला ग्रह साबित होगा। बॉलिवुड में श्रीदेवी ने सबसे पहले 1975 में फिल्म “जूली” में सह अभिनेत्री के तौर पर काम किया। उस समय दशाएं थीं, चंद्रमा में सूर्य की। यानी अभिनय की शुरुआत से लेकर बॉलिवुड तक का सफर चंद्रमा ने पूरा करवा दिया। 1979 में आई फिल्म “सोलहवां सावन” से श्रीदेवी ने बॉलिवुड में अपने मुख्यरूपेण अभिनय कॅरियर की शुरुआत की। इस समय दशाएं थी मंगल में बुध की। मंगल योगकारी है लेकिन स्वामित्त्व के आधार पर बुध लाभकारी ग्रह नहीं है अत: यह फिल्म श्रीदेवी को पहचान दिलाने में असफल साबित हुई। 1983 में रिलीज हुई फिल्म “हिम्मतवाला”से बॉलिवुड में श्रीदेवी के सफलता की कहानी शुरू हुई। उस समय दशाएं थीं, राहू में राहू की। जैसा कि मैनें पहले ही कहा कि राहू अभिनय के मामले में श्रीदेवी को बडी उंचाइयां देने वाला ग्रह है अत: इसके बाद श्रीदेवी के करिअर की गाडी सरपट दौडने लगी। राहू का एक चमत्कार और देखिए; 25 मई 1987 को रिलीज हुई फ़िल्म मिस्टर इंडिया ने श्रीदेवी को एक नया नाम दिलाया, "हवा-हवाई"। ज्योतिष में राहू को हवा कहा गया है। और उस समय श्रीदेवी की कुण्डली में दशाएं थीं, राहू में बृहस्पति में राहू की। इसलिए ये कहना पूरी तरह सही होगा कि राहू ने ही श्रीदेवी को "हवा-हवाई" बनाया।

दिसम्बर 1992 के बाद इन पर राहू के साथ केतु की दशा का प्रभाव शुरू हुआ। केतु छठे भाव में बैठा है अत: इस दशा में रिलीज फिल्म “रूप की रानी चोरों का राजा”के फ्लॉप होने के बाद से श्रीदेवी का ग्राफ गिरता चला गया। राहु में शुक्र में शनि की दशा में इन्होंने बोनी कपूर से विवाह कर लिया। जो उम्र में इनसे काफी बडे थे। इनकी कुण्डली भी पांच से पंद्रह साल तक बडे व्यक्ति अथवा उम्र में छोटे व्यक्ति से विवाह का संकेत कर रही है।

अक्टूबर 2011 से फ़रवरी 2013 तक इन पर बृहस्पति में चंद्रमा की दशा चल रही है। चंद्रमा ही इनको अभिनय और बॉलिवुड में लेकर आया था वही इनकी वापसी भी करवा रहा है। जी हां फिल्म इंग्लिश-विंग्लिश से 14 साल बाद श्रीदेवी  बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। चंद्रमा का कमाल देखिए कि यह फिल्म श्रीदेवी को दिमाग में रखकर ही लिखी गई है। दशाएं गुरु के साथ चंद्रमा की हैं अत: इन्हें रोल भी गुरु यानी इंगलिश सिखाने वाले का मिला है यह भी एक इत्तिफाक ही है। सूत्रों के अनुसार यह फ़िल्म 21 सितम्बर 2012 को रिलीज हो रही है। उस समय श्रीदेवी की दशाएं होंगी। गुरु में चंद्रमा में केतू की। महादशा और अंतरदशा तो ठीक हैं लेकिन प्रत्यंतरदशा अनुकूल नहीं है। इसी केतू की अंतरदशा नें श्रीदेवी के करिअरग्राफ को नीचे गिराया था। इसलिए फिल्म इंग्लिश-विंग्लिश को बडी सफलता मिलने में संदेह है। लेकिन बृहस्पति-चंद्रमा की दशा और श्रीदेवी के जादू के कारण फ़िल्म औसत दर्जे की सफलता हासिल कर सकती है।
 

पं. हनुमान मिश्रा

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