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नए कलाकारों के लिए रोड़ा नहीं हूं : अमिताभ (साक्षात्कार)

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21 मार्च 2014
मुंबई|
अमिताभ बच्चन ने अपनी प्रतिभा और सफलताओं के दम पर 'महानायक' का खिताब पाया है, लेकिन वह नए कलाकारों की प्रतिभा से विस्मित दिखते हैं। उनका कहना है कि वे लोग जिस तरह की दौड़ में हैं, वह उसमें शामिल नहीं हैं।

71 वर्षीय बिग बी का अभी भी मुख्य भूमिकाओं पर कब्जा है, यह हिंदी फिल्मोद्योग में एक दुर्लभ बात है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बच्चन को फिलहाल अपनी अगली फिल्म 'भूतनाथ रिटर्न्‍स' की रिलीज का इंतजार है।

आईएएनएस के साथ एक ई-मेल साक्षात्कार में उन्होंने अपनी फिल्म 'भूतनाथ रिटर्न्‍स', बॉलीवुड में सितारों की नई पौध और और रोजाना उनकी राह में आने वाली उपाधियों के बारे में बात की।

पेश है साक्षात्कार का अंश :

फिल्म के जरिए बच्चों से जुड़ना सबसे मुश्किल काम है। 'भूतनाथ रिटर्न्‍स' सरीखी फिल्म से बच्चों के साथ जुड़कर कैसा लगता है?

"भूतनाथ' एक प्यारा किरदार है। मेरा ख्याल है कि बच्चों को उससे जुड़ना पसंद है। हमें आशा है कि वे 'भूतनाथ रिटर्न्‍स' को भी पसंद करेंगे।"

आपका अपने परिवार को छोटे बच्चों से काफी लगाव है। आपने उनसे क्या सीखा?

"यही कि आजकल का बच्चा अपने बाप का भी बाप है।"

'भूतनाथ रिटर्न्‍स' आम चुनाव के दौरान रिलीज हो रही है। आपको लगता है कि इससे फिल्म पर कोई असर पड़ेगा?

"मुझे ऐसा होने की उम्मीद नहीं है।"

बीते वर्षो में फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में बदलाव आया है। आप बदलावों के बारे में क्या सोचते हैं?

"हां, जब समय बदलता है तो इसके साथ बहुत कुछ बदलता है..सोच, संकल्पना, कहानी कहने का तरीका, संगीत..सब कुछ।"

एक सुपरस्टार, महानायक होते हुए आपके लिए एक आम आदमी की जिंदगी जीना कितना मुश्किल है?

"आपने मुझे जो उपाधियां दीं, मैं उनमें से कुछ भी नहीं हूं। ये उपाधियां मीडिया ने गढ़ी हैं। मैं एक आम आदमी हूं और सामान्य जीवन जीता हूं।"

वह क्या चीज है जिस कारण आप फिल्मोद्योग में बने रहना चाहते हैं?

"अन्य रचनात्मक अनुभव लेते रहने की चुनौती।"

आप अपने जीवन के करीब 45 साल फिल्म जगत को दे चुके हैं। क्या आप इस बात से सहमत हैं कि आप अभी भी शीर्ष अभिनेता हैं और नए अभिनेताओं को टक्कर दे रहे हैं।

"निश्चित रूप से ऐसा नहीं है। मैं उनकी राह में रोड़ा नहीं हूं।"

आप एक अभिनेता, पति, पिता, दादा-नाना हैं..सबसे मुश्किल ओहदा कौन सा है और क्यों?

"एक अभिनेता को थोड़ा छोड़ दें तो बाकी ये सभी जिंदगी के सबसे सुखद ओहदे हैं। मैं एक पति, पिता, दादा-नाना होकर धन्य हूं।"
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