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'निराश अमेरिका भारत से रक्षा सम्बंधों में मजबूती जारी रखेगा'

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29 अप्रैल 2011

वाशिंगटन। नई पीढ़ी के लड़ाकू विमान सौदे सम्बंधी अमेरिकी प्रस्ताव को भारत द्वारा नामंजूर किए जाने से निराश अमेरिका ने कहा है कि वह भारत से अपने रक्षा सम्बंधों को मजबूत करने की प्रक्रिया जारी रखेगा। अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्स ने भारत के फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए झटका बताया है।

पेंटागन के प्रवक्ता कर्नल डेव लेपन ने गुरुवार को कहा कि भारत ने अमेरिका को अपने फैसले से सूचित कराया है। उन्होंने कहा, "हम इस खबर से बेहद निराश हैं लेकिन हम भारत के साथ अपने रक्षा सम्बंध मजबूत करने की प्रक्रिया जारी रखेंगे।"

उन्होंने कहा, "अमेरिका दुनियाभर में अपने रक्षा सहयोगियों को दुनिया की सबसे उन्नत और विश्वसनीय प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराता है।"

इससे पहले भारत ने लॉकहीड मार्टिन एफ 16 आईएन और बोइंग एफ ए 18 की निर्माता कम्पनियों को सूचित किया था कि ये विमान भारतीय वायु सेना के लिए बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी परीक्षण में शामिल नहीं किए गए हैं।

न्यूयार्क टाइम्स ने इस सूचना के बाद लिखा कि भारत का निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के लिए झटका है, जो कि इस सौदे के लिए गंभीर प्रयास कर रहे थे और नवम्बर में हुए भारत दौरे के समय यह उनकी प्राथमिकता में शामिल था।

समाचार पत्र ने कहा, "भारत और अमेरिका के राजनीतिक और आर्थिक सम्बंधों में गर्मजोशी आई है और अमेरिकी हथियार निर्माता कम्पनियां विभिन्न सौदे हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।"

न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा, "शीत युद्ध के दौरान अमेरिका से सम्बंध बेहतर नहीं होने से भारत सैन्य सामग्रियों के लिए सोवियत संघ पर निर्भर था और अब भी पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता को लेकर चिंतित है।"

भारत के निर्णय पर 'डॉगफाइट' शीर्षक से 140 पृष्ठ की रिपोर्ट लिखने वाले विद्वान एश्ली टेलीस ने कहा, "अमेरिकी सरकार इस निर्णय से बेहद निराश है।"

उन्होंने कहा, "यह निर्णय पूरी तरह से तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर लिया गया है और इसमें विमानों की लागत और रणनीतिक पक्षों की कोई भूमिका नहीं रही है।

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