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'दमादम कलंदर' के बीच क्रिकेट वर्ल्ड कप का आगाज़

icc world cup 2011

17 फरवरी 2011

ढाका। बंगबंधु स्टेडियम में हर लिहाज से ऐतिहासिक उद्घाटन समारोह के साथ गुरुवार को आईसीसी विश्व कप-2011 का आगाज हो गया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खचाखच भरे स्टेडियम में विश्व कप की शुरुआत की घोषणा की। हसीना की इस घोषणा के साथ पूरा स्टेडियम मन को मोह लेने वाली आतिशबाजी से नहा उठा।

इसी के साथ 14 टीमों के बीच क्रिकेट का नया विश्व विजेता बनने की स्पर्धा की शुरुआत हो गई। अगले 43 दिनों तक तीन देशों-भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका के 13 आयोजन स्थलों पर इन टीमों के बीच श्रेष्ठता की जंग होगी। इस जंग का समापन 2 अप्रैल को मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में होगा, जहां पूरी दुनिया को एक बार फिर मनोरम आतिशबाजी का इंतजार रहेगा।

क्रिकेट ने जिस तरह वर्षों से दिलों को जोड़ने का काम किया है, उससे राजनीति हस्तियां और राष्ट्र प्रमुख भी अछूते नहीं हैं। यही कारण है कि 10 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले देश की प्रधानमंत्री के तौर पर शेख हसीना ने अपने सम्बोधन में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हमेशा की तरह क्रिकेट के माध्यम से विश्व में एकता और सद्भाव बढ़ेगा। साथ ही हसीना ने विश्व कप की मेजबानी दिए जाने को लेकर आईसीसी का धन्यवाद किया।

हसीना के सम्बोधन से पहले आईसीसी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि क्रिकेट के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि इस विश्व कप को इसके शानदार उद्घाटन समारोह के लिए हमेशा याद किया जाएगा। पवार ने कहा, "यह क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक दिन है। हम इतिहास बनाने जा रहे हैं। इस विश्व कप को इसके शानदार उद्घाटन समारोह के लिए हमेशा याद किया जाएगा।"

पवार ने उद्घाटन समारोह के शानदार आयोजन के लिए प्रधानमंत्री शेख हसीना, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) और इस आयोजन से जुड़े आईसीसी के तमाम अधिकारियों का धन्यवाद किया। साथ ही साथ विश्व कप-2011 को सफल बनाने की दिशा में अपना सहयोग देने के लिए पवार ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और उनकी सरकार का भी धन्यवाद किया।

रिक्शे पर सवार होकर आए कप्तान :

खेल और राजनीति हस्तियों के सम्बोधन से पहले भारतीय कवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित बांग्लादेश का राष्ट्रगान 'आमार सोनार बांग्ला..' बजाया गया। इसके बाद आम लोगों की सवारी रिक्शा का खास बनने का पल आया था। यह वह वक्त था जब सभी 14 टीमों के कप्तान इस पर सवार होकर बंगबंधु स्टेडियम पहुंचे थे। कप्तानों के रिक्शे पर सवार होकर स्टेडियम में पहुंचने की खबर दुनिया भर के समाचार पत्रों में पहले ही प्रकाशित हो चुकी थी लेकिन इस पल का सभी को इंतजार था क्योंकि यह बांग्लादेश में आम लोगों की सवारी को खास दर्जा देने और अपनी संस्कृति को जिंदा रखने की बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और यहां की सरकार की खास पहल थी।

इससे पहले कभी भी विश्व कप में हिस्सा लेने वाले देशों के कप्तान रिक्शे में सवार होकर उद्घाटन समारोह में नहीं पहुंचे थे। कुछ कप्तानों के लिए तो रिक्शे की सवारी का यह पहला मौका होगा। बहरहाल सभी कप्तानों ने रिक्शे की इस संक्षिप्त सवारी का लुत्फ लिया और मुस्कुराते हुए क्रिकेट प्रेमियों का अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद सभी कप्तान स्टेडियम के मध्य में बने पोडियम पर कतारबद्ध हो गए।

कप्तानों के आने से पहले विश्व कप का शुभंकर स्टम्पी एक रिक्शे पर सवार होकर स्टेडियम में पहुंचा था। स्टम्पी को लोगों ने खूब प्यार दिया। स्टम्पी और कप्तान जिस पोडियम पर खड़े थे, उसके चारों एक बारगी जोरदार आतिशबाजी शुरू हो गई। इसके बाद भारतीय फिल्मों के मशहूर गायक सोनू निगम ने 'स्प्रिट ऑफ क्रिकेट' नाम से एक गीत प्रस्तुत किया।

बसंती रंग में रंगा स्टेडियम :

उसके बाद बंगबंधु स्टेडियम बसंती रंग में रंग गया। फिल्म 'रंग दे बसंती' के टाइटल गीत पर भारतीय कलाकारों ने रंगों और भावों के शानदार संयोजन के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाला नृत्य किया। रंग दे बसंती से पहले स्टेडियम में महाराष्ट्र का एक गीत-संगीत पेश किया गया।महाराष्ट्र में ही विश्व कप का फाइनल मुकाबला खेला जाना है। भारत को अपने हिस्से का कार्यक्रम पेश करने के लिए कुल 20 मिनट का समय मिला और इस दौैरान भारतीय कलाकारों ने अपने शानदार संयोजन से सबका मन मोह लिया।

इसके बाद बारी सहमेजबान श्रीलंका की थी। श्रीलंकाई कलाकारों ने इस शानदार मौके का फायदा उठाते अपनी कला एवं संस्कृति का मनोरम नजारा पेश किया। श्रीलंकाई कलाकारों की रुख्सत के बाद बारी स्थानीय कलाकारों की थी। बांग्लादेशी गायिका सबीना यासमिन और रूना लैला ने अपनी मधुर आवाज से ऐसा समां बांधा कि लोग मानों अपनी सीटों से चिपक गए हों। स्टेडियम के कुछ कोनों पर तो लोग नाच रहे थे।

दमा-दम मस्त कलंदर से भरा जोश :

भारतीय फिल्मों में गाना गा चुकीं रूना लैला इन सबमें एक खासा परिचित चेहरा थीं। रूना से उस गाने की उम्मीद की जा रही थी, जिसने उन्हें भारत में भी खासा लोकप्रिय कर दिया था। दरअसल यह गाना नहीं बल्कि एक सूफियाना कलाम था, जिसके माध्यम से रूना को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली थी। लोगों की मनोदशा को भांपते हुए रूना ने 'दमा-दम मस्त कलंदर' शुरू किया तो पूरा स्टेडियम उत्साह से भर गया। रूना की आवाज में सचमुच जादू है।

इसके बाद 'आमार सोनार.' का चित्रण किया गया। इस गीत के माध्यम से बांग्लादेश की सांस्कृति विरासत को दुनिया को दिखाने का प्रयास किया गया। आयोजक जानते थे कि विश्व कप उद्घाटन समारोह का प्रसारण 180 देशों में हो रहा है और बांग्लादेश को अपनी संस्कृति की झलक दिखाने का इससे बेहतर अवसर नहीं मिल सकता था, लिहाजा उन्होंने अपनी संस्कृति और विरासत के चुनिंदा फूलों को दुनिया को दिखाने में कोई असर नहीं छोड़ी।

बांग्लादेश के कलाकारों को प्रदर्शन के बाद बारी थी कनाडाई रॉक स्टार ब्रायन एडम्स की। ब्रायन बेहद सम्मानित कलाकार हैं। उन्होंने अपने रॉक संगीत से माहौल को बदलने को भरपूर कोशिश की और इसमें वह काफी हद तक सफल भी हुए लेकिन इसके बाद होने वाले कार्यक्रम ने माहौल को एक बार फिर भारतीय और बांग्लादेशी बना दिया।

विश्व कप के आधिकारिक गीत 'दे घुमा के' की पेशकश के लिए उसके संगीतकार और गायक शंकर, एहसान और लाय स्टेज पर पहुंच चुके थे। इस गीत के माध्यम से क्रिकेट की जीवंतता को दिखाने का प्रयास किया गया है। शंकर ने इसमें अपनी सुर-मधुर आवाज का जादू घोला है और उनके साथियों ने इस दौरान उनका शानदार अंदाज में साथ दिया है।

रंगारंग आतिशबाजी ने मन मोहा :

उद्घाटन समारोह का यह अंतिम पेशकश था और इसके बाद ढाका के आसमान में जो नजारा देखा गया, वह बांग्लादेश के अब तक के इतिहास में कभी नहीं दिखा होगा। रंगारंग आतिशबाजी से पूरा बंगबंधु स्टेडियम नहा गया। स्टेडियम के अंदर, ऊपर और बाहर हर ओर आतिशबाजी ही आतिशबाजी हो रही थी। यह नजारा मन में बसा लेने लायक था। यह सचमुच अद्भुत था।

इस तरह की आतिशबाजी दुबई के अटलांटिस होटल के उद्घाटन के अवसर पर की गई थी और अगर बांग्लादेश उस नजारे की बराबरी करता हुआ दिख रहा था तो इसके लिए उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। इस तरह एक ऐसे उद्घाटन समारोह का समापन हुआ, जिसे क्रिकेट की विशालता, सह्दयता और अनेकता में एकता के रंग को देखा। साथ ही साथ इस उद्घाटन समारोह ने बांग्लादेश को एक क्रिकेट शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।

अब बारी मुकाबलों की है और इसकी शुरुआत 19 फरवरी को ढाका के करीब मीरपुर में स्थित शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में होनी है। यह मुकाबला मेजबान देश को एक बार फिर अपने ऊपर गर्व करने का मौका दे सकता है क्योंकि इस टीम ने 2007 विश्व कप में भारत को हराकर एक अरब से अधिक क्रिकेट प्रेमियों के सपनों को चूर-चूर कर दिया था।

 

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