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महिला-निर्देशकों पर प्रगति-विरोधी होने का ठप्पा : काग्ती

rema kagati talash

10 नवंबर 2012

मुंबई।  बहुचर्चित फिल्म 'तलाश' की निर्देशक रीमा काग्ती हिंदी फिल्मोद्योग को बहुत प्रगतिशील जगह मानती हैं। वह कहती हैं कि यहां महिलाओं के कामकाज के लिए अच्छी स्थितियां हैं लेकिन उन्हें लगता है कि महिला निर्देशकों पर प्रगति विरोधी होने का ठप्पा लगा हुआ है।


काग्ती ने एक सामूहिक साक्षात्कार के दौरान कहा, "'महिला निर्देशक' शब्द पूर्वाग्रह का उलटा है। देश में बहुत से क्षेत्र और जगहें ऐसी भी हैं जहां एक महिला होना वाकई मुश्किल है। शुक्र है, मैं कभी ऐसी परिस्थिति में नहीं रही, मेरा पालन पोषण सामान्य तरीके से हुआ और मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझे और मेरी दो बहनों को प्रोत्साहित किया।"


काग्ती ने आगे कहा, "जब मैंने फिल्मोद्योग में काम करना शुरू किया तो मेरे बारे में भी बहुत सी बातें कही जाती थीं। लेकिन मैंने महसूस किया फिल्मोद्योग काफी प्रगतिशील क्षेत्र है और यहां महिलाओं के लिए काम का माहौल अच्छा है। उद्योग में महिला निर्देशक तो हैं लेकि न अभी भी महिला निर्देशकों पर प्रगति-विरोधी होने का ठप्पा है।"


वर्ष 2007 में आई रीमा की पहली निर्देशित फिल्म 'हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड' काफी सफल रही थी और इसे आलोचकों की भी सराहना मिली थी। इस वक्त वह अपनी दूसरी निर्देशित फिल्म 'तलाश' को सिनेमाघरों में उतारने के लिए तैयार हैं।


रीमा कहती हैं उनकी फिल्म कामचलाऊ रोमांचक सिनेमा नहीं है और इसी वजह से इसने आमिर खान का ध्यान खींचा जो फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहे हैं।


काग्ती ने कहा, "मेरी पहली फिल्म 'हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड' में ऐसा कुछ था जिसने मुझे आकर्षित किया और अब 'तलाश' की कहानी से मुझे प्यार हो गया है। जोया और मैंने फिल्म की पटकथा लिखते हुए इस बात का पूरा ध्यान रखा कि कहानी के साथ पूरी तरह ईमानदारी बरतें।"


जब उनसे पूछा गया कि क्या आमिर जैसे स्टार कलाकार का फिल्म में होना प्रदर्शन के पहले ही फिल्म की सफलता की गारंटी है, तो उन्होंने कहा, "बिल्कुल जब आपके पास एक अच्छा अभिनेता है और आपने फिल्म सीमित बजट के अंदर बनाई है तो आप बिल्कुल अच्छी सम्भावनाओं की अपेक्षा करते हैं।"

 

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