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भुल्लर मामले में प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग

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30 मई 2011

चण्डीगढ़। खालिस्तानी आतंकवादी देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की दया याचिका राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा खारिज किए जाने के बाद शिरोमणि अकाली दल ने रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रधानमंत्री से इस मामले में 'सीधे और तुरंत हस्तक्षेप' करने की मांग की गई है।

ज्ञात हो कि भुल्लर खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का आतंकवादी है। वर्ष 1993 के एक कार विस्फोट में दोषी पाए जाने पर उसे फांसी की सजा दी गई। इस विस्फोट में 12 लोग मारे गए जबकि युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एम.एस. बिट्टा सहित 29 लोग घायल हुए थे।

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और अकाली दल के अध्यक्ष एवं उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की ओर से जारी एक बयान में प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया एक सकारात्मक कदम 'शिष्टता का प्रतीक होगा।' यह सिख समुदाय और केंद्र सरकार के बीच कटुता और संदेह को आगे विकृत होने से बचाएगा।

उड़ीसा में एक हिंदू कार्यकर्ता दारा सिंह द्वारा ईसाई धर्म प्रचारक की हत्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देकर बयान में कहा गया है कि न्यायालय ने 'धार्मिक एवं भावनात्मक तथ्यों' के आधार दारा सिंह की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।

अकाली नेताओं ने कहा कि यही आधार भुल्लर के मामले में न अपनाने का कोई कारण नहीं है। यदि भुल्लर मामले में भी फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाता है तो इससे देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

उल्लेखनीय है कि भुल्लर को वर्ष 1995 में जर्मनी से भारत लाया गया और न्यायालय ने उसे वर्ष 2001 में दोषी ठहराया। उसकी दया याचिका वर्ष 2003 से राष्ट्रपति के पास लम्बित थी। उसकी दया याचिका मंजूर किए जाने के लिए सिख समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ता एक अभियान चला रहे हैं।

 

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