8 फरवरी 2012
नई दिल्ली | दिल्ली उच्च न्यायालय ने फलक एवं बच्चों से सम्बंधित ऐसे मामलों में तथ्यों का खुलासा करने एवं मीडिया को दिशा निर्देश देने के लिए बुधवार को राज्य सरकार से एक समिति का गठन करने के लिए कहा। न्यायालय ने ऐसे मामलों में मीडिया पर नियंत्रण के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.के. सीकरी एवं न्यायमूर्ति आर.एस. एंडलॉ की खंडपीठ ने मीडिया को दिशा निर्देश देने के लिए दिल्ली सरकार से एक समिति का गठन करने के लिए कहा जिससे इसकी प्रारम्भिक रपट सात मार्च तक आ सके।
गम्भीर रूप से घायल दो वर्ष की फलक को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में 18 जनवरी को भर्ती किया गया था। बच्ची के शरीर पर मानव दांत के निशान भी थे।
इस समिति में बाल न्याय बोर्ड के प्रमुख, केंद्र एवं दिल्ली सरकार, 'नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड्स राइट्स', भारतीय प्रेस परिषद, मीडिया और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
एक अधिवक्ता की फलक जैसे मामले में मीडिया के कवरेज पर दिशा निर्देश की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने केंद्र एवं राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में फलक एवं उसे एम्स लाने वाले 15 वर्षीय किशोरी को लेकर मीडिया में मची खलबली की तरफ संकेत किया गया था।
याचिकाकर्त्ता ने कहा, "मीडिया के कवरेज ने दोनों बच्चों के जीवन को इस हद तक सनसनीखेज बना दिया है कि दोनों बच्चे इस घटना को कभी भुला नहीं पाएंगे।"