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मालदीव में शांति, होगा राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन

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मालदीव में शांति, होगा राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन

8 फरवरी 2012

माले/संयुक्त राष्ट्र | मालदीव में तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मोहम्मद नशीद के इस्तीफे और मोहम्मद वहीद के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के एक दिन बाद बुधवार को माले शहर में शांति रही। नए राष्ट्रपति ने सभी पार्टियों को साथ लेकर गठबंधन सरकार बनाने की बात कही है। उधर, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने उम्मीद जताई है कि मालदीव में सत्ता परिवर्तन से वहां हिंसा व तनाव कम होगा और शांति आएगी। पिछले कई सप्ताह से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का गवाह रही रिपब्लिक चौक पर बुधवार को अमूमन शांति रही। लोग परिवारों के साथ घूमते देखे गए।

मालदीव के नए राष्ट्रपति वहीद ने घोषणा की कि वह सभी पार्टियों को साथ लेकर गठबंधन सरकार बनाएंगे, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) भी शामिल होगी। राष्ट्रपति का पद सम्भालने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आए वहीद ने कहा कि राष्ट्रीय एकता वाली सरकार गठित करने के लिए बातचीत जारी है।

वहीद ने कहा, "मैं देश के विभिन्न भागीदारों के साथ गठबंधन की भावना से काम करूंगा। उनके साथ मिलकर हम एक स्थिर लोकतांत्रिक देश बनाने की स्थिति में होंगे, जहां व्यक्तिगत आजादी का सम्मान होगा और ऐसे संविधान का संरक्षण व सम्मान होगा, जो हमारे लोगों के अधिकारों से सम्बंधित विधेयक को गारंटी दे।"

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने मालदीव में सत्ता परिवर्तन से वहां हिंसा व तनाव कम होने तथा शांति आने की उम्मीद जताई। मून के प्रवक्ता मार्टिन नेसिरकी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "मालदीव में सत्ता हस्तांतरण से बीते कुछ महीनों से जारी राजनीतिक संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकल सकेगा।"

वक्तव्य के मुताबिक, "मून ने मालदीव के लोगों से हिंसा से दूर रहने और उनके देश के सामने आ रही चुनौतियों का सकारात्मक ढंग से सामना करने व मालदीव द्वारा हाल के वर्षो में स्थापित लोकतंत्र और कानून के राज की रक्षा करने के लिए कहा।"

मालदीव की जनता में राजनीतिक हालात को लेकर चर्चा जोरों पर रही। नशीद के बारे में एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है, "वह (नशीद) अपने ही लोकतांत्रिक प्रयासों के शिकार हो गए, जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने पूर्ववर्ती तानाशाह के 30 वर्ष के शासन के बाद देश में की थी।"

वहीं, कानून के एक छात्र ने नशीद को एक निर्वाचित तानाशाह बताया। उसने कहा, "वह (नशीद) एक निर्वाचित तानाशाह थे। हमने उन्हें निर्वाचित किया, लेकिन वह ताकत के बल पर सत्ता में बने रहना चाहते थे।"

नए राष्ट्रपति वहीद का स्वागत करते हुए उसने कहा, "परिवर्तन हमेशा अच्छा होता है। वहीद ने संयुक्त राष्ट्र में काम किया है और उनके बहुत से कूटनीतिक सम्बंध हैं और सबसे बढ़कर सभी सातों राजनीतिक पार्टियां उनका समर्थन कर रही हैं। यह देश के लिए अच्छा है।"

वहीं, मालदीव के एक बजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि इस द्वीप राष्ट्र की तुलना सीरिया तथा मिस्र से नहीं की जानी चाहिए। यह एक शांतिप्रिय देश है, जहां एक व्यक्ति ने 30 साल तक शासन किया और दूसरे ने केवल तीन वर्ष तक। उन्होंने यहां सैन्य तख्ता पलट से इंकार किया।

नशीद ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे न्यायाधीश अब्दुल्ला मोहम्मद की गिरफ्तारी का आदेश दिया था जिसके बाद उन्हें विरोध-प्रदर्शन का सामना करना पड़ा और सेना तथा पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। मानवाधिकार कार्यकर्ता रह चुके नशीद ने वर्ष 2008 में पिछले करीब तीन दशक से मालदीव पर शासन कर रहे तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को चुनाव में पराजित कर पहली लोकतांत्रिक सरकार बनाई थी।



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