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ऋतु कुमार ऋतु की पाँच कविताएँ

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ये ख़्वाब हैं मेरे
अँजुरी भर-भर पीता हूँ
पीता हूँ होंठों से
साँसों से पीता हूँ जिसे
वह
खुशबू है जीवन की
माँगता हूँ
सुझाव अपने दिल से
जाहिर करता हूँ चाहत
अपनी आत्मा से
कि
इसी जन्म में
कर लेना चाहता हूँ हर तमन्ना पूरी
यह जो उमड़ रहा है
मेरी आँखों में
सैलाब है जीवन का !

कुछ नहीं है यह
झुंझलाहट के सिवा

अजब है यह आदमी भी
कि होता है
उसे
हर रोज मरना
हर रोज जीना
कि एक दिन
जीने-मरने की इस भट्ठी में
तबाह कर डालता है
वह
अपना सब-कुछ
कि न होता है उसका जीना
न होता है उसका मरना
यहाँ तक कि
झोंक देता है वह खुद को भी
इसी भट्ठी में
न होता अगर
इस दुनिया में वह
तो इसी झुंझलाहट में
तबाह होनी थी
यह
अखिल दुनिया भी
जो उसकी नहीं थी !

जाने से पहले
जानता हूँ कि जाना है
कभी न लौटने के लिए
लेकिन जानता हूँ यह भी कि
नहीं होगी यह अन्तिम यात्रा भी
क्योंकि बदलनी होंगी अभी राहें
करनी होंगी यात्राओं के बाद
और भी यात्राएँ !                

जंगल से भी ज्यादा घना और अंधेरा होता है अकेलापन
यादें बहुत सुकून देती हैं
यदि छा जायें वे तुम्हारे ऊपर भीतर-बाहर कड़कती धूप में बादलों की तरह
फिर चाहे जितनी दूर हो जाना
अनुभव नहीं होती कोई थकावट
तुम सिर्फ अपने लिए ही
नहीं जीते
यदि छोड़ आये हो अपने पीछे किसी के लिए खट्ठी-मीठी
यादें
रात में अकेले
चलते समय
तुम्हें छू तक नहीं जाती अकेलेपन की घुटन
तुम्हारे मस्तिष्क में
बजता रहता है यादों का संगीत
तुम्हारी आत्मा में घुलती रहती है चाँद-सितारों की रोशनी
अच्छे-अच्छों को नहीं पता कि
सत्य से भी श्यादा चमकदार होता है यादों का अनुभव
अच्छे-अच्छों को नहीं पता कि
जंगल से भी श्यादा घना और अंधेरा होता है अकेलापन
ख़ासकर तब जब डूब रहा होता है किसी का हृदय अकेले में
और नहीं दिखता रोशनी का एक कण भी
मेरा मन जो डूबा है अवसाद में
धीरे-धीरे हो रहा है मृत्यु का अनुभव
ऐसे में नहीं है यादों के सिवा मेरा कोई सहारा
यादें ही हैं जो रख सकती हैं मुझे अपने में समेटकर सुरक्षित !

अदृश्य को बीतते हुए देखना
दिखती है तुम्हारी बढ़ती हुई उम्र
लेकिन नहीं दिखते तुम्हारे घटते हुए दिन !

 
कवि परिचय- ऋतु कुमार ऋतु
जन्म: 29 मार्च 1970 को एक छोटे से गाँव बख़्तावर खेड़ा में, संडीला से सम्ब (जिला हरदोई, उत्तर प्रदेश में).
शिक्षा: मूलतः स्वाध्याय, औपचारिक शिक्षा वेफ रूप में, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय से सिर्पफ दसवीं कक्षा उत्तीर्ण.
सृजन: पिछले अट्ठारह वर्षों से अधिकांश प्रतिष्ठित, साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का निरंतर प्रकाशन.
निधन: 15 अगस्त 2009


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