HindiLok.com - Hindi News, Hindi Movies, Hindi Songs, Hindi Literature
 
 
 
 
 
 

यायावर की डायरी : अपने ही देश में पराए परिन्दे

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

यह गुप्तचर शाखा का दफ्तर था. दबे कुचले अपने में ही सिकुड़े, वर्षा से भीगी सीली भेड़ों की तरह वे एक झुंड में बैठे थे. कुएँ में या कहीं भी कोई एक कूदे तो सभी उसके साथ कूदने को तत्पर. बीच में नेणाराम मुखर होता पर दफ्तर में दीवार पर टँगी तख्ती पढ़कर दुबक जाता. क्योंकि एक बार सी.बी.आई. के थानेदार ने उसकी सिर्फ इसी बात पर कि फ्सर, इसी धरती पर कभी हमारा भी एक घर था, पर एक सुबह सोकर उठे पता चला वह इलाका अब पाकिस्तान है. तब तक हमें नहीं मालूम था कि जहाँ पीढ़ियों से हमारे पुरखे रहते आ रहे हैं, जहाँ हमारी ओलनाल गढ़ी हुई है, जिसकी गन्ध हमारी नस-नस में है, वे इसलिए तंग कर रहे हैं कि हम हिन्दू हैं, और आप इसलिए कि हमारा घर पाकिस्तान में था. अब घर हवा में तो बना नहीं सकते. कहने पर न सिर्फ घुड़का बल्कि कन्धें पर जो डंडे मारे उनका दर्द आज भी रह-रहकर उभर आता है.

और बल्लूराम जिसका आध परिवार यहाँ आध सीमा के उस पार. वह कभी उस घड़ी को कोसता है जब अपना देश समझकर लुकता छिपता यहाँ आया और कभी उस घड़ी को जब छपन्या के अकाल में उसके पूर्वज मारवाड़ छोड़कर उमरकोट गये. पता नहीं कब धरती बँटी. इधर के पंछी इधर और, उधर के पंछी उधर. इधर के हिन्दू, उधर के मुसलमान. याद है तो इतना ही कि कुछ इधर रह गये कुछ उधर भागे. जो अपने मुलक माटी को छोड़कर नहीं भागे. वे दोनों ही देशों में संदिग्ध निगाहों से देखे गये और अब तक दबोचे जा रहे हैं.

1999 में पाकिस्तान की संसद में तत्कालीन संसदीय सचिव किशन भील ने कहा था कि फ्यहाँ हिन्दू सिर्फ लुटने के लिए हैं, जिन्हें या तो डाकू लूटते हैं या पुलिस और ठीक यही बात उसी दौरान भारत में हिन्दू सिंह सोढ़ा कर रहे थे कि फ्हमारी विश्वसनीयता यहाँ भी संदिग्ध है और वहाँ भी. डॉ. हरदयाल सिंह जिनकी ससुराल पाकिस्तान में है कहते हैं कि फ्वहाँ जाता हूँ तो मैं संदिग्ध हूँ और पत्नी तो दोनों जगह. और बरसों पहले पाकिस्तान के छाछरो गाँव से आये रणवीर सिंह सोढ़ा ने एम.जी.एच अस्पताल के वार्ड में लेटे हुए भावुक क्षणों  में गहरी घनी मूछों के भीतर दबे दर्द को हँसी में उड़ाते हुए कहा था फ्गद्दार हैं तो गोली से उड़ा दो, अपने हैं तो प्यार करो, पर दोगलापन नहीं. और यही ताप और दर्द मैं मार्वी की आँखों में देख रहा था.

पाकिस्तान से आये हुए अभी 2009 में करीब पाँच हजार लोग हैं जो राजस्थान के जोध्पुर-जैसलमेर सम्भाग में रह रहे हैं. ये वे लोग हैं जो बरसों से यहाँ रह रहे हैं. यहाँ की पुलिस व लोगों के अत्याचार से तंग आकर कभी शादी-ब्याह के बहाने, छुप-छुपाकर वहाँ से भाग आये. कई ऐसे हैं जो तारबन्दी पार करते हुए मारे गये. हिन्दू सिंह सोढ़ा बताते हैं कि एक बार तो एक दस बरस का लड़का मारा गया. बाद में पता चला उसका परिवार पाकिस्तान में था और ननिहाल हिन्दुस्तान में. दोनों परिवारों के बीच मात्रा एक लड़का. जब ननिहाल की याद आयी तो बार्डर पर तारों के बीच में निकलने लगा और एक गोली इधर से एक गोली उधर से और घंटों वह नो मेन्स लैंड पर पड़ा रहा. दोनों देशों की नजरों में वह जासूस था.

पाकिस्तान से आये ज्यादातर निम्न वर्ग के लोग हैं जो पत्थर खदानों में काम करते हैं या फिर चैखटों पर रोज कुआँ खोदते और रोज पानी पानी पीओ की हालत में रह रहे हैं. वैसे तो सभी जातियों के लोग हैं पर भील व मेघवालों की संख्या अधिक है. पहले थाने में हर महीने हाजिरी देनी पड़ती थी अब गुप्तचरी के दफ्तर में. वैसे गुप्तचर शाखा के अधिकारी कभी भी कहीं भी बुला सकते हैं. इंडियन सिटीजनशिप मिलने के बावजूद इनकी विश्वसनीयता हमेशा सन्देह के घेरे में रहती है. डॉ. रामचन्द्र मेघवाल को यहाँ की नागरिकता मिलने के बावजूद जेल जाना पड़ा क्योंकि उनके पास एम.बी.बी.एस. की डिग्री पाकिस्तान की थी. जबकि उनका पुश्तैनी गाँव आज भी जैसलमेर की शिव तहसील में है. पिछले दिनों हाजिरी के दौरान अस्सी वर्षीया अपनी बीमार बूढ़ी माँ को उसका बेटा मीलों दूर से कन्धें पर लादकर लाया था तो पाँच दिन के नवजात को गोद में लिये एक प्रसूता को तपती धूप में दिन भर बैठना  पड़ा था और तपते बुखार में आये रल्लू को तो ऐसी हवा लगी कि वह आज तक खाट पर लेटा हुआ है. सी.आई.डी. की पुलिस अधीक्षक प्रशाखा माथुर का रवैया पहली बार कुछ नरम हुआ था और उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि हाजिरी के नाम पर महिलाओं और बीमारों को तंग नहीं किया जाये.

केन्द्रीय और राज्य सरकार ने विस्थापितों की समस्याओं के सन्दर्भ में अभी तक कोई गम्भीर प्रयास नहीं किये. आश्वासन जरूर मिलते रहे. नैणाराम से बात करते हुए मुझे रघुवीर सहाय की पंक्तियाँ याद आती रहीं जिसमें ‘नो मेन्स लैंड’ में पड़ी लाश को लेने के लिए न इधर का देश तैयार था और न उधर का. हिन्दू सिंह सोढ़ा ने कहा कि ठीक यही स्थिति आज पाक विस्थापितों की है.

72/5, शक्ति कॉलोनी, रातानाड़ा, जोधपुर.



1955
ताजातरीन / What's Hot
हरि‍याणा : सम्मान के नाम पर बहन का कत्ल, 3 गिरफ्तार
POK में मौजूद है चीन: अमेरि‍की कार्यकर्ता
लोकतांत्रिक तरीके से किसी से भी बातचीत को तैयार: नीतीश
अमेरिकी ओपन : भूपति-मिर्नी दूसरे दौर में
भारत बनाएगा दुनिया की सबसे बड़ी सौर दूरबीन
बिहार में नक्सलियों का 1 पुलिसकर्मी की हत्या का दावा
भारत में पांच साल में तीन गुना बढ़ेंगे इंटरनेट प्रेमी
यहां भगवद गीता के साथ कुरान भी पूजी जाती है
   
 
मनोरंजन
तुसाद म्यूजियम का हिस्सा बनी पॉप स्टार रिहाना
लंदन। मशहूर पॉप स्टार रिहाना वाशिंगटन स्थित मैडम तुसाद म्यूजियम की हिस्सा बन गई हैं। रिहाना की मोम से बनी प्रतिमा का मंगलवार को अनावरण किया गया।
 किम की ख्वाहिश 'सेक्स एंड द सिटी 3' बने
 अभी मां बनने को तैयार नहीं हैं बियोंसे नोल्स
 बड़ा परिवार चाहती हैं अदाकारा जेसिका एल्बा
 'वैनिटी फेयर' के मुखपृष्ठ पर नजर आएंगी लोहान
इंटरव्यू
कला के बीच नहीं आ सकतीं मजहब की दीवारें: बि‍रजू महाराज
कथक का पर्याय हैं बिरजू महाराज। 72 साल की उम्र में भी उनके हौसले जवां हैं। नृत्य उनके लिए साधना है, जिसमें लीन होने के बाद उनके पैरों की थाप से एक नयी दुनिया सजती है। कथक की धारा के साथ बहते-बहते कब वो बृजमोहन नाथ मिश्रा से पंडित बिरजू महाराज हो गये उन्हें खुद भी पता नहीं चला। नई पौध को कथक की बारीकियों से सजाने-संवारने में उन्हें बहुत आनंद आता है। उनसे खास बात की प्रतिभा कटियार ने।
 ‘पीपली लाइव’ मेरी और महमूद दोनों की फिल्म है: अनुषा
 मैं भटकती आत्मा हूं: डॉ. असगर वजाहत
ज्योतिष