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कालका-हावड़ा रेल हादसे में 63 की मौत, 150 से ज्यादा घायल

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11 जुलाई 2011

फतेहपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में रविवार दोपहर कालका-हावड़ा एक्सप्रेस के 14 डिब्बों के पटरी से उतर जाने की वजह से कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई और 150 से ज्यादा घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।  बहुत से लोग क्षतिग्रस्त डिब्बों में फंसे हुए हैं।

हादसे के घंटों बाद भी ग्रामीण और राहतकर्मी पलटे हुए डिब्बों को काटने और उनमें फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। यह हादसा लखनऊ से 150 किलोमीटर की दूरी पर फतेहपुर जिले के मालवा में हुआ।
 

रविवार से राहत व बचाव कार्य का नेतृत्व कर रहे कर्नल ए.डी.एस. ढिल्लन ने कहा, "हम दुर्घटनाग्रस्त हुए 14 डिब्बों का अंतिम बार परीक्षण कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और शव उसमें फंसा तो नहीं है।"

दुर्घटना स्थल पर संवाददाताओं से ढिल्लन ने कहा कि अब तक हमने दुर्घटनाग्रस्त हुई कालका मेल के विभिन्न डिब्बों से 63 शवों को निकाला है।

अधिकारियों के मुताबिक राहत व बचाव अभियान में खोजी कुत्तों को भी लगया गया है ताकि रेलगाड़ी के मलबे में दबे किसी शव का पता लगाया जा सके।

फतेहपुर के उप जिलाधिकारी रामचन्द्र ने बताया कि घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य के दौरान रात से सुबह तक 28 शव बरामद किए जाने के बाद मरने वालों की संख्या  63 तक पहुंच गई है। पुलिस व सेना की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पैंट्री कार और वातानुकूलित डिब्बों सहित सात डिब्बे बिल्कुल पलट गए हैं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन ने इस हादसे पर दुख व्यक्त किया है। पिछले तीन दिनों में रेल हादसे की यह दूसरी घटना है। हादसे का कारण पता नहीं चल सका है।

यह हादसा उस समय हुआ जब रेलगाड़ी 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से मालवा रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ी चली जा रही थी और चालक ने कथित तौर पर आपातकालीन ब्रैक्स का इस्तेमाल किया।

बृजलाल ने बताया कि 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी ग्रामीणों के साथ राहत कार्यो में जुटे हुए हैं। घटनास्थल पर सबसे पहले ग्रामीण पहुंचे और उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुंचाना शुरू कर दिया।

हरियाणा के कालका जा रही इस रेलगाड़ी में करीब 1000 यात्री सवार थे। यह रेलगाड़ी पश्चिम बंगाल के हावड़ा से आ रही थी।

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर)के सीनियर डेवलपमेंट ऑपरेशंस मैनेजर प्रदीप ओझा ने बताया, "बहुत से लोग अब तक डिब्बों में फंसे हुए हैं।"

सभी घायलों को दुर्घटनास्थल से करीब 17 किलोमीटर दूर फतेहपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

एनसीआर महाप्रबंधक हरीश चंद्र जोशी ने एनडीटीवी को बताया कि रेलगाड़ी पूरी रफ्तार से मालवा स्टेशन की ओर बढ़ रही थी और पटरी से उतर गई। 10 डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

उन्होंने बताया कि 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि विशेष उपकरणों और पेशेवर व्यक्तियों के अभाव में पूरी तरह पलट गए डिब्बों से घायलों को बाहर निकालने में कठिनाई हो रही है।

बुरी तरह घायल कुछ लोगों को कपड़ों में लपटेकर वाहनों से फतेहपुर शहर के अस्पतालों में पहुंचाया गया।

बहुत से घायल मुसाफिर अपने सामान से ही कुचले गए हैं, कुछ स्तब्ध दिखाई दे रहे हैं, शीशे तोड़ दिए जाने के बाद कुछ घिसटकर खिड़कियों से बाहर निकले। कुछ यात्रियों ने टीवी संवाददाताओं से मदद मांगी और अपने परिजनों का पता लगाने की अपील की।

केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने ही मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।

रेल राज्य मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने दुर्घटनास्थल की ओर रवाना होने से पहले मीडिया को बताया कि मृतकों के निकट सम्बंधियों को पांच-पांच लाख रुपये और गम्भीर रूप से घायल होने वालों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मामूली रूप से घायल होने वालों को 25 हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हादसे की जांच कराई जाएगी।

दुर्घटनाग्रस्त रेलगाड़ी के डिब्बे अन्य पटरियों पर जा गिरने की वजह से रेलवे को 12 रेलगाड़ियां रद्द करनी पड़ीं जबकि 23 का मार्ग बदलना पड़ा।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कानपुर और इलाहाबाद से दो राहत रेलगाड़ियां मौके पर रवाना की गई हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा एक रेलगाड़ी मुसाफिरों को नई दिल्ली ले जाएगी।

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से है और रोजाना एक करोड़ 40 लाख मुसाफिरों को उनकी मंजिल तक पहुंचाता है।

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