नई दिल्ली, 19 मार्च
विमानों का अपहरण करने या मिसाइल के रूप में उनका इस्तेमाल करने के दोषियों के लिए अब अपने देश में मौत की सजा का प्रावधान होगा। इस आशय का फैसला शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
विमान अपहरणकर्ताओं में खौफ पैदा करने व उनसे निबटने के मद्देनजर विमान अपहरणनिरोधी अधनियम 1982 में यह प्रावधान किया जाएगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने विमान अपहरणकर्ताओं को मौज की सजा देने के लिए इस अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया था। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने इस अपनी मुहर लगाई थी।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, "विश्व भर में मौत की सजा का प्रावधान खत्म किए जाने की बात हो रही है। इस पर चर्चा के लिए सरकार ने मंत्रियों का एक समूह गठित किया था। उनके प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है।"
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के साथ इस अधिनियम को अगले महीने संसद में पेश किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन में भारतीय वायु सेना को अपहृत विमान को रोकने और उसे बलपूर्वक जमीन पर उतारने की अनुमति रहेगी।
इसमें यह भी प्रावधान है कि यदि ऐसे सबूत मिल जाते है कि अपहृत विमान को मिसाइल के रूप में इस्तेमाल कर किसी महत्वपूर्ण ठिकाने को निशाना बनाया जा सकता है, तो उसे मार गिराया जा सकता है।