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कथादेश (दिसम्बर 2009)

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Kathadesh Hindi Magazine
साहित्य, संस्कृति और कला का समग्र मासिक
कहानियाँ
१.
२.
३.
४.
  
आलेख
५.
गिरिराज किशोर : विष्णु जी के बेटे अतुल की डायरी पढ़ते हुए
६. वीरेन्द्र कुमार बरनवाल : 'हिन्द स्वराज' की शती पर गांधी और उत्तर आधुनिक बोध
 
यात्रा संस्मरण
७. अनिल सिन्हा : जैट लैग के दिनों के बाद मुक्ति
 
कविताएँ
८. शहंशाह आलम की कविताएँ
 
दलित प्रश्न
९. ओम प्रकाश वाल्मीकि : मेरी कविताओं का आंतरिक यथार्थ
१०. बजरंग बिहारी तिवारी : ओमप्रकाश वाल्मीकि कि कविता यात्रा
११. ओम प्रकाश वाल्मीकि कि कविताएँ
१२. बजरंग बिहारी तिवारी : विमर्श नहीं दलित जीवन कथा
१३. श्यौराज सिंह बेचैन : मेरा बचपन मेरे कन्धों पर : रचना प्रक्रिया और कुछ आस-पास के सवाल
१४. सृंजय : इतर के पानी भीतर गईल, चुम्मा लेत जाति गइल (सच्ची कथा)
 
रंगमंच
१५. हृषीकेश सुलभ : छत्तीसगढ़ के रंग के विविध रंग
१६.  देवेन्द्र राज अंकुर : बनारस में अपरिचित : तीसरा पड़ाव
 
मीडिया
१७. अनिल चमड़िया : मीडिया एक भीड़ तंत्र है
  
समीक्षा
१८. ब्रजेश : सभ्यता के शिल्प को तलाश करती कविताएँ
१९. विभांशु दिव्याल : नंगे सच के हथौड़े से गढ़ी गई कहानियाँ
  
सम्वाद-प्रतिवाद
२०.
  
यायावर की डायरी
२१. सत्यनारायण : सासों के बाजे
 
कवियन की वार्ता
२२. विश्वनाथ त्रिपाठी : आचार्य राम चन्द्र शुक्ल की मूँछें
 
लघुकथा
२३. अलिन्द उपाध्याय : चित और पट
२४. प्रदीप मिश्रा : 'ईमान'
 
गतिविधियाँ
२५. साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियाँ
 
अनुगूंज
२६. पाठकों के पत्र


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ताजातरीन / What's Hot
युवराज को कैंसर नहीं, अमेरिका में चल रहा ट्यूमर का इलाज
उप्र चुनाव : पहले चरण का प्रचार थमा, मतदान बुधवार को
रोटी,शराब और पेट्रोल
सहारा को लेकर बीसीसीआई के रवैये में नरमी
मोदी से धौनी तक, सबने की युवराज के लिए दुआ
पुण्य प्रदायनी माघी पूर्णिमा
रोमानिया के प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दिया
जनता ने चाहा तो जरूर आऊंगा राजनीति में : रॉबर्ट वाड्रा
   
 
मनोरंजन
ऑस्कर नामांकनों में डीकैप्रियो नहीं, नाओमी निराश
लास एंजेलिस | अभिनेत्री नाओमी वाट्स ऑस्कर नामांकनों में अभिनेता लियोनार्दो डीकैप्रियो का नाम न होने से निराश हैं। नाओमी को उम्मीद थी कि डीकैप्रियो 'जे एडगर' में अभिनय के लिए नामांकित होंगे। 43 वर्षीया नाओमी का कहना है कि इस वर्ष ऑस्कर की सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में डीकैप्रियो नामांकन के हकदार थे और उन्हें शामिल नहीं किए जाने पर वह हैरान हैं।
 वारविक को लाइफटाइम अचीवमेंट
 दिल्ली के अच्छे रेस्तरां जानना चाहते हैं श्वात्जनेगर
 जब आंसू नहीं रोक पाईं मिडिलटन
 'द एक्स फैक्टर' से बाहर की गईं पाउला
इंटरव्यू
ब्लू मांउटेन से जुड़े बिवाद के बारे मे नहीं बोलूंगी- ग्रेसी सिंह
लगान, मुन्नाभाई एमबीबीएस और गंगाजल जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपनी अदायगी का जौहर दिखा चुकी बॉलीवुड अभिनेत्री ग्रेसी सिंह एक बार फिर अपने सधे हुए अभिनय से लोगों को दीवाना बनाने को तैयार हैं। जीवनधारा प्रोड्क्शन के बैनर तले बन रही फिल्म ब्लू माउंटेन में ग्रेसी एक संघर्षरत गायिका की भूमिका में हैं और वह इस भूमिका को बड़ी चुनौती के रुप में देख रही हैं। पेश है उनसे खास बातचीत :
 लाइफ्स गुड में हर किसी के लिए छुपा है खास- आनंद शुक्ला
 ‘पत्थर और मूर्तियां लगवाने के अलावा मायावती ने क्या किया है’
ज्योतिष
पुण्य प्रदायनी माघी पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा को पृथ्वी का दुर्लभ दिन माना गया है , ब्रह्मवैवर्तपुराण में उल्लेख है कि माघी पूर्णिमा पर स्वयं भगवान नारायण गंगाजल में निवास करतें है । इस पावन घड़ी में कोई गंगाजल का स्पर्शमात्र भी कर दे तो उसे बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है । मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व जल में भगवान का तेज मौजूद रहता है, देवताओं का यह तेज पाप का शमन करने वाला होता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व जब आकाश में पवित्र तारों का समूह मौजूद हो उस समय नदी में स्नान करने से घोर पाप भी धुल जाते हैं। माघ पूर्णिमा के विषय में कहा जाता है कि जो व्यक्ति तारों के छुपने के पूर्व स्नान करते हैं उन्हें उत्तम फल की प्राप्ति होती है। जो तारों के छुपने के बाद पर सूर्योदय के पूर्व स्नान करते हैं उन्हें माध्यम फल की प्राप्ति होती। जो सूर्योदय के पश्चात स्नान करते हैं वे इस दिन के उत्तम फल की प्राप्ति से वंचित रह जाते हैं। इसलिए इस दिन शास्त्रानुकूल आचरण करते हुए तारों के छुपने के पूर्व स्नान करने का विधान है। इसलिऐ इस पावन पर्व पर ओम नमः भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करते हुए स्नान और दान करना चाहिए । माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करने वाले पर भगवान विष्णु कि असीम कृपा रहती है। सुख-सौभाग्य, धन-संतान कि प्राप्ति होती है इसलिए माघ स्नान पुण्यशाली माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि कलयुग की शुरुआत माघ पूर्णिमा के दिन से ही हुई थी। इसलिए इस पूर्णिमा पर स्नान करने से कलियुग के सारे पाप धुल जाते हैं। साथ ही दान कर्म पुण्यदायी होता है।
 शारीरिक तौर पर सक्रिय बच्चे रहते हैं बीमारियों से दूर
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 अध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 'माघ' मास
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