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रणजी ट्रॉफी में आमूल परिवर्तन

fundamental changes in ranji trophy

12 जून 2012

मुम्बई। सौरव गांगुली के नेतृत्व वाली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की तकनीकी समिति ने मंगलवार को रणजी ट्रॉफी में आमूल परिवर्तन की मांग की और इलीट तथा प्लेट डिवीजनों में बदलाव के कई प्रस्ताव सामने रखे। क्रिकेट सेंटर में मंगलवार को हुई बैठक में बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने इस मुद्दे पर काफी समय तक चर्चा की और इस नतीजे पर पहुंची कि रणजी ट्रॉफी के इलीट और प्लेट ग्रुप की जगह तीन ग्रुप होंगे और हर ग्रुप में नौ-नौ टीमें होंगी।

गांगुली ने बैठक के बाद कहा, "हमने दो बदलाव किए हैं। अब ए, बी और सी ग्रुप में नौ-नौ टीमें होंगी। हर टीम लीग स्तर पर आठ मैच खेलेगी। इसमें प्रोमोशन और रेलीगेशन का प्रावधान होगा।"

"ये बदलाव प्रतिस्पर्धा को संतुलित करेंगे। साथ ही साथ हर टीम को कुछ अधिक मैच खेलने को मिलेंगे। याद रहे कि यह महज प्रस्ताव हैं और इस पर बीसीसीआई को अंतिम फैसला लेना है।"

नए फॉरमेट के मुताबिक लीग स्तर पर हर टीम आठ-आठ मैच खेलेगी। ग्रुप ए, बी और सी से दो टीमों नॉकआउट दौर के लिए क्वालीफाई करेंगी। समिति ने क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल को पांच दिवसीय रखने का प्रस्ताव दिया है।

नॉटआउट दौर में अगर मैच का परिणाम पांच दिनों में नहीं निकलता है तो उसे छठे दिन तक खींचा जाएगा। छठे दिन भी पहली पारी के आधार पर कोई फैसला नहीं निकलता है तो सिक्का उछालकर फैसला किया जाएगा।

जीत की सूरत में एक टीम को छह अंक मिलेंगे। पारी या फिर 10 विकेट से जीत की सूरत में टीमों को बोनस भी मिलेगा। अगर टीमों के बीच दोनों पारियों में टाई होता है तो फिर प्रत्येक टीम को तीन-तीन अंक मिलेंगे।

पहली पारी की बढ़त से टीमों को तीन अंक मिलेंगे। पहली पारी के आधार पर टाई होने पर और कोई परिणाम नहीं निकलने पर टीमों को एक-एक अंक मिलेगा।

समिति ने घरेलू सीमित ओवर क्रिकेट में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया। समिति के मुताबिक इन मैचों में एक गेंदबाज को अधिक से अधिक 12 ओवर और एक ओवर में दो बाउंसर फेंकने का अधिकार मिलना चाहिए।


 

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