5 फरवरी 2012
चेन्नई| एंट्रिक्स निगम और देवास मल्टीमीडिया के बीच विवादास्पद सौदे की जांच करने वाली पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रपट में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष जी. माधवन नायर और तीन अन्य वैज्ञानिकों को गम्भीर अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इस सौदे के कारण सरकारी खजाने को दो लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है, जबकि एक अन्य दो सदस्यीय समिति ने सीएजी के नुकसान के अनुमान से असहमति जताई है।
पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा है कि विभिन्न अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसले में गम्भीर खामियां रही हैं, और कुछ मामलों में की गई कार्रवाइयां सार्वजनिक विश्वासघात की कगार तक हैं।
जबकि दो सदस्यीय उच्च अधिकार प्राप्त समीक्षा समिति ने सीएजी द्वारा अनुमानित नुकसान से असहमति जताई है और देवास को सस्ते में स्पेक्ट्रम बेचने की बात को भी खारिज कर दी है। इस समिति में पूर्व कैबिनेट सचिव बी.के. चतुर्वेदी और अंतरिक्ष आयोग के सदस्य रोदम नरसिम्हा शामिल रहे हैं।
अन्य तीन वैज्ञानिकों में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव ए. भास्करनारायण, एंट्रिक्स के पूर्व कार्यकारी निदेशक के.आर. श्रीधरमूर्ति और इसरो उपग्रह केंद्र के पूर्व निदेशक के.एन. शंकरा शामिल हैं।
करार के अनुसार, इसरो की व्यावसायिक शाखा, एंट्रिक्स द्वारा देवास को 70 मेगाहर्ट्ज एस-बैंड स्पेक्ट्रम मुहैया कराने थे। देवास, मल्टीमीडिया सेवा में है। एंट्रिक्स को, मुख्यरूप से देवास के लिए निर्मित दो उपग्रहों के ट्रांस्पोडर्स पट्टे पर देकर स्पेक्ट्रम मुहैया कराने थे।
सीएजी का अनुमान है कि इस सौदे से सरकारी खजाने को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बाद में केंद्र सरकार ने इस विवादास्पद सौदे को रद्द कर दिया।
इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने हाल ही में घोषणा की थी कि विवादास्पद सौदे की जांच करने वाली दोनों समितियों की रपटें सार्वजनिक की जाएंगी।
इसरो ने दोनों समिति के निष्कर्षो तथा सिफारिशों को शनिवार देर शाम अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया।
सिन्हा समिति ने अंतरिक्ष विभाग और एंट्रिक्स को इस सौदे तक ले जाने के लिए नायर, भास्करनारायण, श्रीधरमूर्ति और शंकरा को मुख्यरूप से जिम्मेदार ठहराया। समिति ने सिफारिश की कि सरकार को इनके खिलाफ पेंशन नियम की उचित धाराओं या कानून के किसी अन्य प्रावधान के तहत कार्रवाई करे।
समिति ने सेवानिवृत्त अधिकारियों एस.एस. मीनाक्षीसुंदरम और वीणा राव के खिलाफ भी पेंशन नियम के तहत, तथा जी. बालचंद्रन व आर.जी. नादादुर के खिलाफ उचित सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।
समिति ने देवास के स्वामित्व के तरीके में बदलाव करने, व्यक्तियों व अधिकारियों द्वारा हासिल किए गए अवैध वित्तीय लाभ की किसी उचित एजेंसी से जांच कराने, तथा देवास के शेयरों की मूल्य वृद्धि की उस मात्रा की जांच कराने की सिफारिश की है, जिससे लोगों ने लाभ कमाया था।
समिति ने देवास में शेयर लेने के तरीके की और देवास में हिस्सेदारी रखने वाली मॉरिशस की दो कम्पनियों की भी जांच कराने की सिफारिश की थी।
समिति के अनुसार, उस प्रौद्योगिकी की उपयोगिता पर केंद्रीय दूरसंचार विभाग सहित केंद्र सरकार के किसी भी अन्य विभाग से कोई परामर्श नहीं किया गया, जो उपग्रह और जमीनी प्रणालियों के जरिए मोबाइल रिसीवरों को मल्टीमीडिया व सूचना सेवा की आपूर्ति कराने वाली थी। इसके अलावा इस सौदे के लिए दो उपग्रहों का निर्माण करने से पहले प्रस्तावित सेवाओं की विनियामक जरूरतों पर भी कोई परामर्श नहीं किया गया था।
सिन्हा समिति ने कहा है कि इनसैट प्रणाली के सम्पूर्ण प्रबंधन और गैरसरकारी उपयोगकर्ताओं द्वारा उपग्रह के उपयोग के लिए सिफारिश करने वाली संस्था, इनसैट समन्यव समिति (आईसीसी) की बैठक 2004 में नहीं हुई थी।
ऐसे में आईसीसी से परामर्श लिए बगैर एंट्रिक्स-देवास सौदे के लिए दो उपग्रहों का प्रावधान सरकारी नीति का स्पष्ट उल्लंघन है।
देवास के साथ जिस तिथि (28 जनवरी) को करार पर हस्ताक्षर किए गए थे, उस तिथि को न तो अंतरिक्ष आयोग को बताया गया न कैबिनेट की उस टिप्पणी में ही उसका खुलासा किया गया, जिसके जरिए दो उपग्रहों में से एक जीसैट-6 के निर्माण की अनुमति मांगी गई थी।
लेकिन उच्च अधिकार प्राप्त दो सदस्यीय समीक्षा समिति ने कहा है कि इस करार के कारण सरकार को सम्भवत: इतना बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, और उसने एंट्रिक्स बोर्ड के अध्यक्ष, अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग की वित्त समिति के सदस्य, और इसरो में उपग्रह केंद्र के निदेशक को सौदे में वित्तीय और रणनीतिक खामियों के लिए प्राथमिकतौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
समिति ने कहा है कि एंट्रिक्स-देवास सौदे के कई बिंदुओं को अंतिम निर्णय लेने वाले इसरो और एंट्रिक्स बोर्ड के अध्यक्ष को कुछ खामियों की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए।
केंद्र सरकार ने 13 जनवरी को नायर, भास्करनारायण, शंकरा और श्रीधरमूर्ति को कोई भी सरकारी जिम्मेदारी सम्भालने या किसी सरकारी समिति की सदस्यता लेने से प्रतिबंधित कर दिया था।
लेकिन नायर का कहना है कि सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से पहले उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने का मौका नहीं दिया गया। नायर को 1998 में पद्मभूषण और 2009 में पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।