वाशिंगटन, 10 फरवरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि जीवन के शुरुआती दिनों का तनाव वयस्कों के अंदर हृदय रोग का कारक बन सकता है।
शोधकर्ता जेनिफर पोलक ने कहा, "हम मानते हैं कि जीवन के शुरुआती दौर के तनाव रक्तचाप में इजाफा करने वाले हार्मोन को ज्यादा संवेदनशील बनाने के साथ वयस्क होने पर आपमें हृदय रोग के खतरे को और बढ़ाते हैं।"
पोलक जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेज (एमसीजी) में नाड़ी जीवविज्ञान केंद्र में एक बायोकेमिस्ट और इस शोध के सह लेखक हैं।
इस अध्ययन के लिए चूहों के बच्चों को दो सप्ताह तक लगातार तीन घंटे तक रोजाना उनकी माताओं से अलग रखा गया। इस दौरान इन पर हृदय रोग संबंधी बीमारी के मुख्य कारकों जैसे उच्च रक्तचाप, दिल की धड़कन या फिर रक्त कोशिकाओं पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला।
लेकिन जब चूहों के बच्चे बड़े हुए तो उनके अंदर रक्तचाप बढ़ाने जैसे प्रमुख लक्षणों को बढ़ाने वाले हार्मोन में वृद्धि देखी गई।
पोलक ने कहा, "ये चूहे सामान्य जानवरों की तरह तनाव को सहन नहीं कर पाए। कुछ दिनों के भीतर इनके रक्तचाप में दोगुना की वृद्धि देखी गई।"