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कहानी - जन्मदिन की पार्टी Kathadesh
राजेन्द्र श्रीवास्तव ’रंजन’
फिर वही होटल ताज था, वही गेट-वे ऑफ इंडिया, वही गरजता-लरजता समुद्र और बड़ी आसानी से पटाई गई फैक्टरी की तेल चुपड़े बालों वाली सहकर्मी सुनीता...
प्रभात की दो कविताएँ Kathadesh
प्रभात
प्रभात की दो कविताएँ
आलेख - कृष्ण बलदेव वैद का लेखन और हिन्दी साहित्यिक संस्कृति Kathadesh
मदन सोनी
वैद के लेखन के साथ हमारी साहित्यिक संस्कृति के सम्बन्ध को समझने का यह आग्रह इसलिए है कि वह एक अद्वितीय सम्बन्ध है. शायद ही कोई दूसरा लेखन होगा जिसके साथ इस संस्कृति का वैसा सम्बन्ध रहा होगा जैसा वह वैद के लेखन के साथ रहा है...
समीक्षाएँ - बदलाव का वैज्ञानिक, व्यावहारिक और मार्मिक पाठ Kathadesh
निरंजन श्रोत्रिय
हिन्दी कथा-जगत में भालचन्द्र जोशी उन विरले कथाकारों में से हैं जिन्होंने समकालीन हिन्दी कहानी को न सिर्फ एक नई भाषा और शिल्प प्रदान किया है बल्कि संवेदना एवं प्रतिबद्धता को भी एक नये अलोक में प्रस्तुत किया है...
हमसफर - रिजल्ट्स फैब्रिकेट नहीं किये अनिता गोपेश ने Kathadesh
प्रणय कृष्ण
जिन्दगी और कहानी की प्रयोगशाला में अनिता जी ने कभी रिजल्ट्स फैब्रिकेट नहीं किये. अनीता जी के व्यक्तित्व की अनेक पहचानें हैं. वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राणिविज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं, कुशल वैज्ञानिक हैं, संवेदनशील अभिनेत्री रही हैं, इलाहाबाद आर्टिस्ट एसोसिएशन की आज भी सक्रिय सदस्य हैं, कथक में प्रशिक्षित हैं, अनेक डांस-बैले और नाटकों में काम कर चुकी हैं, इलाहाबाद के तमाम मानवाधिकार और स्त्री अधिकार जमातों में अनिवार्य उपस्थिति हैं...
आलेख - अवैध निर्माण और शहरी विकास Kathadesh
विनोद शाही
कार्पोरेट सेक्टर व्यावसायिक महत्व की सारी जमीन पर काबिज होने की फिराक में है. इसके लिए जरूरी है- व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों के बीच विभाजक रेखा का एकदम तय होना. रिहायशी इलाकों में व्यवसाय की सुविधा को अवैध करार दिये बिना और लागू करवाये बिना इसे इस सेक्टर का पूरा कब्जा सम्भव नहीं. शहरों में अवैध निर्माण के ध्वंस के लिए आधार बने शहरी विकास के नियम और कानून आज पुर्नविचार की माँग करते हैं...
ओम भारती की तीन कविताएँ Kathadesh
ओम भारती
ओम भारती की तीन कविताएँ
कहानी - कुल टोटल जमा योग Kathadesh
रोमेश जोशी
मुम्बई पुलिस कमिश्नर पद पर नियुक्ति का ई-मेल मिलते ही मैंने इतने जोर से ठहाका लगाया कि पूरा घर आसपास जमा हो गया. नेट पर रिज्यूमे डालने का यही तो दुर्गुण है, नौकरी देने वाली साइटें जाने कौन-कौन सी जगह पर अप्लाय करने को प्रेरित करती रहती हैं. मगर यह तो अलग ही मामला था. मैंने कोई अप्लीकेशन नहीं दी, फिर भी मुम्बई के बड़ेवालों ने बायोडाटा देख मुझे नियुक्ति देते हुए अनुरोध किया था “आप जल्दी जॉइन कर लीजिये. यहाँ हालत गम्भीर है. प्लेन के ओपन टिकट भेज रहे हैं.”...
अंग्रेजी कहानी – आप कभी कुछ कह नहीं सकते Kathadesh
कांस्टेंस जे. फॉस्टर
जब डॉक्टर मार्लिन डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे, तो उनका दृढ़ विश्वास था कि दुनिया में उन लोगों की भीड़ बढ़ाने से कोई फायदा नहीं जो अपंग या अपाहिज हैं. वह दया मृत्यु (यूथनेशिया) के बहुत बड़े समर्थक थे. इस बारे में वह अपने सहपाठियों से जोर-शोर से बहस भी किया करते थे...
स्त्री चेतना के आलोक में मीरा की कविताओं का पुनर्पाठ Kathadesh
सिद्धार्थ शंकर
समय रचना एवं रचनाकार में नये अर्थ सन्दर्भ भरता है. किसी खास समय की वैचारिक विवृत्तियाँ उन्हें एक नए अर्थ आलोक में जागृत करती हैं. इस प्रकार व्याख्या एवं पाठ की आबद्ध सरणियाँ टूटती हैं और रचना एवं रचनाकार को नवीन प्रसंगों के अनुसार एक नये अर्थ संसार में पुर्नजीवित कर देती हैं. इसलिए पाठ के पुर्नपाठ या अनन्त पाठ या कुपाठ की सम्भावनाएँ निरन्तर बनी रहती हैं.
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कला के बीच नहीं आ सकतीं मजहब की दीवारें: बि‍रजू महाराज
कथक का पर्याय हैं बिरजू महाराज। 72 साल की उम्र में भी उनके हौसले जवां हैं। नृत्य उनके लिए साधना है, जिसमें लीन होने के बाद उनके पैरों की थाप से एक नयी दुनिया सजती है। कथक की धारा के साथ बहते-बहते कब वो बृजमोहन नाथ मिश्रा से पंडित बिरजू महाराज हो गये उन्हें खुद भी पता नहीं चला। नई पौध को कथक की बारीकियों से सजाने-संवारने में उन्हें बहुत आनंद आता है। उनसे खास बात की प्रतिभा कटियार ने।
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