नई दिल्ली, 8 फरवरी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत शुरू करने के सरकार के निर्णय के पीछे वाशिंगटन का भारी दबाव है।
आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है, "सरकार के इस निर्णय के बाद लोग जिस सवाल को पूछ रहे हैं, वह यह है कि क्या पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने को लेकर सरकार के रुख में आया ताजा बदलाव वाशिंगटन के भारी दबाव का परिणाम तो नहीं है?"
आडवाणी ने लिखा है कि बातचीत का यह प्रस्ताव ऐसे समय में किया गया है, जब सरकार इसके पहले तक यह कहती रही है कि पाकिस्तान जब तक मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसके साथ बातचीत शुरू नहीं की जाएगी।
आडवाणी ने लिखा है, "पिछले सप्ताह नई दिल्ली द्वारा पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की बातचीत शुरू करने की अचानक की गई घोषणा ने देश में कई राजनीतिक विश्लेषकों को यह सवाल करने के लिए बाध्य कर दिया है कि कहीं यह बराक ओबामा द्वारा बनाए गए भारी दबाव का परिणाम तो नहीं है?"
आडवाणी ने राष्ट्रपति बनने के पहले ओबामा द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव समाप्त करने के लिए कश्मीर मुद्दे पर एक विशेष दूत की नियुक्ति का संकेत दिया था।
वर्ष 2008 में राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के दौरान ओबामा ने कहा था कि यदि वह चुनाव जीतते हैं तो गंभीर तरीके से कश्मीर मसले के हल के लिए भारत-पाकिस्तान के साथ काम करना उनके प्रशासन के महत्वपूर्ण कार्यो में से एक होगा।